आज़मगढ़ गत रात्रि मिर्जापुर ब्लाक के नियाउज गांव में दस्तान ए उर्दू नियाउज के तत्वधान में एक शाम साजिद खान आदमी के नाम मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया दीप प्रज्वलित जफर सिद्दीकी रुस्तम ने किया मुख्य अतिथि के तौर पर साजिद खान आजमी अबुल जैश अंसारी डा० एहतेशाम मोहम्मद हलीम आमना ज्वेलर्स राहिल अब्दुल्लाह ने शिरकत की इस मुशायरे में खुसूसी आमद हुई राकिम आज़मी दोहा कतर एवं मोहम्मद अशहद की पूरी रात शायर और कवि ने अपनी फसलों और गीतों से मुशायरे को लूट लिया कुंवर जावेद ने तेरा सफर तेरा रास्ता तेरी मंजिल तो आगे बढ़ने में फिर इंतजार किसका है सुनाकर खूब वाहवाही लूटी डॉ नसीमा निशा ने ये दिल जैसे-जैसे मचलता रहेगा यही दर्द ग़ज़लों में ढलता रहेगा ये फिरका परस्ती का आलम जहां में कभी खत्म होगा यह चलता रहेगा सुनाकर खूब तालियां बटोरी अख्तर इलाहाबादी ने रब ने मुझे फल उसका पैकर बना दिया खतरे की आरजू थी समंदर बना दिया सुनाया तबरेज हाशमी ने प्यारा है वतन अपना यह प्यारा ही रहेगा नक्शे में जो भी है वह हमारा ही रहेगा सुनाया शादाब आज़मी ने हिम्मत कहां बची है कि परवाज कर सकूं यह मेरा हौसला है उड़ा जा रहा हूं सुनाया तजस्सुस आसफिया ने सुना किसी के डर से क्यों अपनी मोहब्बत को छुपा लूंगा मैं अपना राजे दिल सबको यहां खुल कर बताऊंगी सुना कर खूब दाद बटोरी अफजल इलाहाबादी ने गीत राधा को सुनाता है चला जाता है बांसुरी कोई बजाता है चला जाता है सुनाया उरूसा अर्शी ने किसी को राजे दिल अपना बताना है बहुत मुश्किल मोहब्बत हो गई तो फिर छुपाना है बहुत मुश्किल सुनाया मोइन गिरिडीह ने जब तेरे साथ जिंदगी होगी फिर मेरे साथ हर खुशी होगी सुनाया साहिल इलाहाबादी ने लुटा देते हैं अपनी जान अजमत पर तिरंगे की हमीदी कौम के वारिस की अब तक शान जिंदा है सुनाया मुशायरे की अध्यक्षता हाजी रिजवान खान महा प्रधान ने एवं संचालन नसीम साज़ ने किया मुशायरे के सेक्रेटरी शेर अली उर्फ मिस्टर सरपरस्त हाफिज शकील अहमद प्रधान व कनवीनर ए मुशायरा शाहनवाज आलम ने सभी का आभार प्रकट किया