Friday, August 29, 2025

चिल्लाते रहे परिजन,आश्वासन देती रही पुलिस, मासूम को गवानी पड़ी जान

    • चिल्लाते रहे परिजन,आश्वासन देती रही पुलिस, मासूम को गवानी पड़ी जानआरोप – समय रहते पुलिस चेती होती तो बच सकती थी बच्चे की जान – मंगल पाल(बच्चे का पिता)

सोनभद्र(विनोद मिश्र)

घोरावल पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली व लचर व्यवस्था का खामियाजा एक मासूम को अपनी जान गंवाकर करना पड़ा । घटना की सूचना के बाद से जहां पुलिस बैकफुट पर है वहीं पेढ़ गांव के ग्रामीण काफी आक्रोशित हैं । पेढ़ गांव पहुंचे सीओ घोरावल ने बच्चे के मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि गांव में माहौल काफी तनावपूर्ण है । बच्चे की डेडबॉडी चुनार पोस्टमार्टम हाउस रखा गया है ।

आपको बतादें कि पिछले 5 मार्च दिन रविवार को गांव की सरहद से दिनदहाड़े एक नाबालिक बच्चा अनुराग पाल पुत्र मंगल पाल (9) का अपहरण हो गया था । अपहरण के घटना की जानकारी एक बच्चे ने देखकर परिजन को बताया था । जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। देर शाम तक जब बच्चा घर नहीं लौटा तो परिजनों ने मामले की जानकारी लिखित रूप में पुलिस को दी थी । अपहरण की तहरीर मिलते ही पुलिस के हाथ-पांव फूलने लगे और घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी । बताया जा रहा है कि जब तक स्थानीय पुलिस कुछ प्लान कर पाती,तब तक अपहरणकर्ता बच्चे को लेकर इलाका छोड़ चुके थे। हालांकि परिजन कई लोगों का नामजद शिकायत की थी। लेकिन पुलिस उन्हें भी ढूंढने में कई दिन लगा दि, जब इंद्रजीत यादव व राजेश यादव को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की तो काफी देर हो चुका था । हालांकि पुलिस आज भी दावा कर रही थी कि वे बच्चे के काफी करीब है और जल्द ही सकुशल बरामद कर लेंगे। लेकिन जब अभियुक्तों के निशानदेही पर सीखड़ गांव के पास पहुंची तो पुलिस के होश उड़ गए, अपहरणकर्ता मासूम की हत्या कर चुके थे ।

इस घटना के बाद इलाके में पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा देखा जा रहा है । इस मामले में पुलिस लगातार लापरवाही बरत रही थी। और परिजनों को लगातार आश्वासन देकर टालमटोल करती रही । परिजन लगातार पुलिस से गुहार लगाते रहे कि नामजद लोगों को गिरफ्तार कर कड़ाई से पूछताछ की जाय तो सारा मामला खुलकर सामने आ जायेगा। लेकिन पुलिस अपने मन की करती रही और होली को सकुशल निपटाने में लगी रही । जबकि पेढ़ गांव में इस बार इसी गम के कारण किसी ने होली नहीं खेला ।

बड़ा सवाल यही है कि क्या घोरावल में अपराधियों के भीतर कानून का डर समाप्त हो चुका है। या फिर घोरावल में पुलिस की कार्यप्रणाली काफी कमजोर हो चुकी है। यदि स्थानीय पुलिस की खुफिया तंत्र घोरावल क्षेत्र में मजबूत होती तो शायद अपहरणकर्ता इलाके से बाहर न जा पाते और मासूम की जान बच जाती।

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