घर में उपेक्षित हुए महाकबि जयशंकर प्रसाद….
साहित्य में राष्ट्रवाद के जनक महाकबि जयशंकर प्रसाद जी आज अपने ही घर में उपेक्षित पड़े हुए हैं, उनकी प्रतिमा वर्षों से निर्माण होकर धूल फांक रही है महज 4 फीट जमीन भी किसी चौराहे पर इस महाकवि के लिए उपलब्ध नहीं है, महाकवि जयशंकर प्रसाद स्मृति न्यास के प्रधान ट्रस्टी सचिव दिव्यांग बंधु डॉ उत्तम ओझा ने बताया कि इस प्रतिमा का निर्माण 2 वर्ष पूर्व उन्होंने जन सहयोग से कराया और यह पूरी तरह प्रतिमा बनकर तैयार है इसके स्थापना लिए उन्होंने प्रयत्न भी किया लेकिन आज तक सफलता नहीं मिल पाई, अपने ही नगर में जयशंकर प्रसाद उपेक्षित हो कर रह गए, वाराणसी शहर में आप कहीं भी घूम आए लेकिन महाकवि जयशंकर प्रसाद जी की कोई प्रतिमा नहीं मिल सकती, आज जयशंकर प्रसाद जी के जन्म दिवस के अवसर पर शासन प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से मैं मांग करता हूं कि उनकी प्रतिमा अति शीघ्र स्थापित की जाए उन्होने आगे कहां कि जो भी व्यक्ति संस्था
इस प्रतिमा को लगाना चाहते हैं मैं उन्हें यह प्रतिमा सहर्ष देने को तैयार हूं
दिव्यांग बंधु डॉक्टर उत्तम ओझा