मनीष कश्यप की गिरफ्तारी और पत्रकारिता काली शंकर उपाध्याय की कलम से
बिहार : बिहार की धरती से जन्मे मनीष कश्यप एक ब्राह्मण परिवार से है और कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने बिहार ही नहीं भारत के बहुत सारे राज्यों में अपने पत्रकारिता का परचम लहरा दिया था, लेकिन किसे पता था कि यह परचम उनके लिए एक बहुत बड़ा घातक साबित हो सकता है, मनीष कश्यप की पत्रकारिता का हम भी एक पत्रकार जगत से हैं, हम खुद उनके पत्रकारिता और उनके बेबाक पत्रकारिता का कायल है, और रहेंगे भी क्योंकि मनीष कश्यप ने कभी किसी सरकार की नहीं सुनी कभी किसी शासन की नहीं सुनी कभी किसी प्रशासन की नहीं सुनी और अपनी बेबाक पत्रकारिता की, लेकिन साउथ इंडिया में हो रहे उत्तर भारतीयों के लिए आवाज क्या उठाई उनके लिए काल बन गया, जांच का विषय है कि मनीष कश्यप जो जो वीडियो शूट किया था साउथ इंडिया का था ये खुद द्वारा फिल्माया गया था या वाकई में सही था लेकिन सूत्रों की माने तो बहुत सारे उत्तर प्रदेश और बिहार में ऐसे लोग साउथ इंडिया से वापस आ चुके हैं जो कि अराजकता के शिकार हो चुके थे, लेकिन मनीष कश्यप ने अपनी बेबाक पत्रकारिता के अलावा एक और गलत कार्य कर दिया या यूं कहें कि किसी के खिलाफ आवाज उठा दिया , बिहार सरकार के खिलाफ भी मनीष कश्यप ने कुछ ऐसी बातें बहुत दी थी जो कि पत्रकारिता से परे थी, ऐसा बोलने के कुछ दिन बाद ही मनीष कश्यप के ऊपर मुकदमा हो गया, की कई कुछ दिन में ही सरकार गिरा दूंगा, पत्रकार के रूप में होते हुए इस तरह की वाणी का नहीं उपयोग करना चाहिए ,लेकिन मनीष कश्यप को भी सरकार प्रताड़ित की होगी, बिहार पुलिस के बाद अब साउथ इंडियन पुलिस पूछ ताछ कर रही है , मनीष कश्यप ने सच तक न्यूज़ चैनल के माध्यम से तमिलनाडु में हो रहे उत्तर भारतीयों के ऊपर अत्याचार को दिखाया था, वीडियो की तफ्तीश जारी है कि मनीष कश्यप ने अपनी सांस तक न्यूज़ के माध्यम से जो वीडियो दिखाई थी तमिलनाडु की वह सही थी या गलत थी,लेकिन मनीष कश्यप खुद अपने पत्रकारिता के माध्यम से या यूं कहें कि मैं निजी तौर पर एक समाचार पत्र के संपादक होने के नाते भी सपोर्ट करता हूं , भारत के अंदर सोशल मीडिया के माध्यम से पत्रकारिता करने वाले पहले व्यक्ति हैं जो इतने आगे हैं और मनीष कश्यप जिस तरीके से पत्रकारिता की दुनिया आगे बढ़ रहे थे उनका नाम आगे बढ़े , इतिहास गवाह है लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी कि पत्रकारिता को लोगों ने शुरू से दबाया है और दबाते रहेंगे लेकिन यह क्या किसी को जेल भेजने से किसी कलम की ताकत रोकी नही जा सकती है सिक्के के दो पहलू होते हैं आज ऊपर तो कल नीचे बदलेंगे जरूर, इसी के साथ मैं अपनी लेखनी को विराम देता हूं जय हिंद जय भारत जय कलमकार,