पूर्व विधायक पंडित रामनाथ पाठक की 26वीं पुण्यतिथि पर विशेष
मानवतावादी राजनीतिज्ञ थे रामनाथ पाठक : मिथिलेश द्विवेदी
सोनभद्र । स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पसही गांव के पण्डित रामनाथ पाठक एक मानवतावादी राजनीतिज्ञ थे जिनके जिगर में
आदिवासियों , गिरिवासियो और वंचितों के प्रति पीर थी । 1962 में रॉबर्ट्सगंज और 1967 में राजगढ़ विधानसभा से कांग्रेस के
विधायक रहे रामनाथ पाठक सभी के प्रिय व हितैषी थे ।
यह विचार सोन साहित्य संगम के संयोजक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश शरण मिश्र की ओर से आयोजित पण्डित रामनाथ पाठक की 26 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि आभासीय सभा मे जुड़ कर अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी व्यक्त कर रहे थे ।
कांग्रेस के तिरंगे मन नेता राजेश द्विवेदी ‘ राज ‘ ने कहा कि पाठक जी संघर्ष करके खड़चरी पर रोक लगवाए थे । वनवासियों
के लिए हल, हरी, जुआ , लग्गा , कोरो , टर्रा , धरन ,
बडेर , जलावनी सूखी लकड़ी आदि निःशुल्क देने के लिए नियम बनवाए थे । मिर्जापुर के दक्षिणांचल को पहाड़ी क्षेत्र घोषित कर इसके लिए विशेष पैकेज देने की मांग तत्कालीन चंद्रभान गुप्त सरकार से करते रहते थे ।
पत्रकार भोलानाथ मिश्र ने 1966 के सूखे को याद करते हुए बताया कि उस समय गांव – गांव
टेस्टवर्क खोलवाने में श्री पाठक जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । 1966-67 में प्रधानमंत्री इंदिरा जी के साथ वाराणसी से इम्पाला कार में बैठ कर राहत कार्य और ओला वृष्टि से हुई तबाही का निरीक्षण कराने बभनौली गांव के पास काफिले को रोक कर होरी साहु के घर को दिखाए थे । उस समय प्राइमरी पाठशाला की छात्रा बभनौली कला गांव की मालती पुत्री कैलाश
नाथ मिश्र और कमली देवी पुत्री घूरन चौकीदार जब इंदिरा जी को माला पहनाने गई तो इंदिरा जी कार से माला लेकर एक माला
कमली देवी और एक माला मालती को पहनाई थी । कक्षा एक के विद्यार्थी भोलानाथ मिश्र की पीठ भी थप थपाई थी । इंदिरा जी के बाई ओर विधायक रामनाथ पाठक कार में बैठे थे ।
उस समय मौके पर स्वाधीनता संग्राम सेनानी पण्डित हरिहर राम पाठक व पण्डित रघुबीर राम पाठक भी इंदिरा जी का स्वागत
किए थे । तत्कालीन हेडमास्टर कन्हैयालाल ,
सहायक अध्यापक रामनरेश राम पाठक , बैजनाथ पाठक ( बेचन पाठक /मिलन जी ) और जवाहरलाल केशरी समेत आस पास के सैकड़ो लोग उसके साक्षी बने थे ।
सोन साहित्य संगम के संयोजक राकेश शरण मिश्र ने कहा श्री पाठक जी का व्यक्तिव व कृतित्व विराट था । हजारों लोगों की उन्होंने नौकरी लगवाई थी ।
सीमेंट फैक्ट्री चुर्क में , लेखपाली , अमीनी , चपरासी , प्राइमरी में
मास्टरी , सिकरेटरी आदि पदों पर क्षेत्रीय युवकों को नौकरी दिलवाने में उनका एक अनूठा उदाहरण है ।
पृष्ठभूमि
साधारण परिवार में जन्मे स्वाधीनता संग्राम सेनानी पण्डित
रामनाथ पाठक किशोरावस्था में ही अंग्रेजों के ख़िलाफ़ संघर्ष में जुट गए थे । 1942 में जेल की यातनाएं झेलनी पड़ी थी । असहयोग आंदोलन , अंग्रेजो
भारत छोड़ो आंदोलन आदि
में सक्रिय योगदान देने वाले
पाठक जी के सुयोग्य पुत्र
डॉक्टर मार्कण्डेय पाठक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में उप परीक्षा नियंता , कुल सचिव ( रजिस्टार )
से अवकाश ग्रहण कर आज भी पीड़ित लोगों को सर सुंदर लाल चिकित्सालय और ट्रामा सेंटर में इलाज उपलब्ध कराने में हर सम्भव सहयोग करते रहते है ।
उनके पौत्र कौशलेश पाठक अपने दादा ( बाबा) के नक्शे कदम पर चल रहे है । इस समय कौशलेश पाठक
कांग्रेस सेवादल के जिला अध्यक्ष है । इनका छोटा भाई कृषि वौज्ञानिक है ।