Friday, August 29, 2025

निकाय चुनाव में बी.एल.ओ की लापरवाही जिम्मेदार कौन कालीशंकर उपाध्याय की कलम से

उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव दो चरणों में होना है प्रथम चरण 4 मई को हो चुका है और दूसरे चरण का चुनाव 38 जिलों में 11 मई को होगा, प्रथम चरण में जो चुनाव हुआ वह ऐसा चुनाव था कि वाकई में काबिले तारीफ था 4 मई के चुनाव में बीएलओ की गड़बड़ियां या यू कह ले की लापरवाहीया खुल के सामने आई है, निकाय चुनाव में कहीं किसी के पति का नाम है तो पत्नी का नाम नहीं पत्नी का नाम है तो पति का नाम नहीं बेटे का नाम है तो मां का नाम नहीं मां का नाम है तो पिता का नाम नहीं इतने से ही यह सिलसिला नहीं रुक जाता कुछ जगह तो ऐसे भी मामले आए हैं कि एक ही पिता के 41 बेटे वोटर लिस्ट में सम्मिलित हो गए हैं बीएलओ इस तरह की लापरवाही क्यों करते हैं क्या अपनी जिम्मेदारियों को वह बखूबी नहीं निभा पाते हैं या निभाना नहीं चाहते या आम जनमानस चुनाव या मतदान को लेकर जागरूक नहीं है जिस तरह से वोटिंग के परसेंटेज पड़े हैं वह भी निराशाजनक रहे हैं लेकिन बीएलओ ने जो गड़बड़ियां की हैं उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा बूथ पर जाकर कड़कड़ाती धूप में जिनको वापस आना पड़ रहा था मुंह पर पसीना गमछा से मुंह पूछते हुए लोग जब वोटर लिस्ट में नाम अपना नहीं पाते हैं तो निराशाजनक स्थिति में अपने घर को लौट जाते हैं और कुछ नहीं होता तो सोशल मीडिया पर ही पोस्ट कर देते हैं आम जनमानस को भी थोड़ा सा जागरूक होना पड़ेगा अखबारों के माध्यम से चुनाव आयोग हर साल आग्रह करता है कि वोटर लिस्ट संशोधन का जो कैंप है चुनाव के पहले लगाया जाता है और सब लोग जाकर अपना नाम संशोधित करा लें या देख ले यह चुनाव नहीं पहली बार ऐसा हुआ है हर चुनाव में  बीएलओ की नाकामियों सामने आती रहती हैं आइए जानते हैं कौन होता है बीएलओ और क्या होते हैं इनके कार्य क्या अपना कार्य खुद नहीं करना चाहते हैं बीएलओ,

बीएलओ के कार्य :

चुनाव आयोग भारत में चुनाव की प्रक्रिया को सरल व सदृढ़ बनाने के लिए प्रयासरत रहता है और इसी प्रयास के चलते चुनाव आयोग यह चाहता है कि चुनावों के समय उसकी पहुँच जमीनी स्तर तक हो जिससे वह मतदाताओं का उचित मार्गदर्शन कर सके व चुनाव की प्रक्रिया को बिना किसी परेशानी के सुलभ तरीके से चला सके। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हए चुनाव आयोग सभी चुनाव क्षेत्रों में बीएलओ की नियुक्ति करता है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि बीएलओ  कौन होता है और वह किस तरह से चुनावों के समय चुनाव आयोग की सहायता करता है। बीएलओ की फुल फॉर्म के साथ साथ इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे है

बीएलओ का फुल फॉर्म होती है Booth Level Officer जिसे हिंदी में बूथ लेवल ऑफिसर लिखा जाता है और इसका हिंदी में अर्थ होता है बूथ स्तर अधिकारी

जमीनी स्तर पर किसी क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए चुनाव आयोग द्वारा बीएलओ  की नियुक्ति की जाती है।बीएलओ  एक सरकारी या अर्ध सरकारी अधिकारी होता है जो चुनाव क्षेत्र से परिचित होता है। अपनी क्षेत्रीय जानकारी का प्रयोग कर वह किसी निश्चित क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया सुचारू करने हेतु चुनाव आयोग की सहायता करता है।

BLO की नियुक्ति प्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट 1950 के सेक्शन (B) (2) के अंतर्गत की जाती है। बीएलओ किसी ऐसे व्यक्ति को बनाया जाता है जो या तो सरकारी ढांचे का हिस्सा हो या फिर लोकल क्षेत्र में कार्यरत हो। बीएलओ चुनाव आयोग का जमीनी स्तर पर प्रतिनिधित्व करता है और इस पद पर नियुक्ति की जाने की शुरुआत अगस्त 2006 से की गई थी।

 बीएलओ यह जिम्मेदारी होता है कि किसी भी व्यक्ति का वोटर लिस्ट से नाम गायब न हो और सब का नाम सही हो और अगर किसी का नाम संशोधित भी करना हो तो बीएलओ इससे संबंधित कार्य करता है,

यदि आपकी उम्र 18 साल से अधिक है तो आप वोटर आईडी कार्ड बनवा सकते हैं। आपके क्षेत्र से संबंधित चुनाव की जानकारी व वोटर आईडी कैसे बनवाई जाए इसकी जानकारी के लिए आप बीएलओ से सहायता ले सकते हैं। बूथ लेवल ऑफिसर का यही कार्य होता है कि वह अपने क्षेत्र के सभी मतदाताओं की चुनाव व वोट से सबंधित समस्याओं को हल करे। इसलिए यदि आपको वोटर कार्ड या चुनाव से संबंधित कोई जानकारी चाहिए तो आप अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं।

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