श्रावण मास मानवीय चेतना का मास है उसमें पुरुषोत्तम मास का कहना ही क्या है भगवान पुरुषोत्तम सृष्टि के संचालन का कार्य भी संभालते हैं जहां पूरी धरती पर मानव महाप्रलय चल रहा अतिवृष्टि अनावृष्टि बाढ़ त्राहिमाम त्राहिमाम करता मानव महादेव को ही मनाने में लगा आखिर क्यों एक यक्ष प्रश्न है तो मैं वास्तव में प्रकृति के अंदर यदि महादेव की पूजा होती है तो प्रकृति संतुलन के लिए ही होती है मस्तिष्क संतुलन के लिए ही होती है जिन ज्ञानियों को शिव जी को दूध चढ़ाने में आपत्ति होती है कि देश के अंदर बहुत से बच्चे दूध के लिए तरस रहे हैं और लाखों लाख लीटर दूध शिवजी के अभिषेक में लग रहा है यह एक यक्ष प्रश्न है कि वास्तव में प्रकृति संतुलन चाहिए या प्रकृति का असंतुलन संतुलन चाहिए महादेव को प्रसन्न करना ही होगा और महादेव के कांवरियों का सम्मान भी करना होगा जो अपने पूरे प्राणों की बाजी लगाकर नंगे पांव जल लेकर गंगाजल करोड़ों तीर्थों का जल लेकर महादेव को जलाभिषेक दुग्ध अभिषेक तेल अभिषेक गन्ने के रस से अभिषेक फलों के रस से अभिषेक पंचामृत अभिषेक करते कराते हैं यदि पंचोपचार षोडशोपचार पूजन करेंगे तो प्रकृति में संतुलन स्वत: हो जाएगा अन्यथा महामारी बीमारी बढ़ेगी सबसे बड़े वैज्ञानिक सबसे बड़े वैद्य सबसे बड़े योद्धा सबसे बड़े संतुलन करता यदि सृष्टि में कोई है तो वह महादेव ही हैं महादेव के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता और जो नकारने वाले हैं वह स्वत: अस्तित्व हीन हो जाएंगे |
पं ओम प्रकाश पांडे “निर्भय”
ज्योतिष ,साहित्य -समाजसेवी, कवि
राष्ट्रीय अध्यक्ष- भारतीय सामाजिक न्याय मोर्चा