Friday, August 29, 2025

सीने में धधकता एक प्रश्न|

बेरहम

 

 

सीने में धधकता एक प्रश्न|

 

कि अपना शहर अब इतना

 

बेरहम क्यों हैं?

 

एक अकेली लड़की को मरता

 

पिटता देख कर भी मौन क्यों

 

हैं?

 

इंसान तरक्की कर रहा, ज़मीर

 

अब मर रहा क्यों हैं?

 

क्या अब खून का रंग लाल नहीं

 

रहा?

 

क्या अब खून का रंग लाल नहीं

 

रहा?

 

और लाल हैं तो थोड़ा पर मौन

 

क्यों हैं?

 

दिल कचोटता, रुदन करता है,

 

और पूछता है, बारम्बार कि

 

इंसान और इन्सानियत में इतना

 

फासाला अब क्यों है?

 

दूसरों की दर्द की तीस, चीख,

 

पुकार, अब हम तक नहीं पहुँच

 

रही |

 

घर ऐसा है तो इतनी मनावता

 

क्यों है

 

पारुल राज

escort bayan sakarya escort bayan eskişehir