देश में देवी का प्रतीक नारी राजनीति का मोहरा हो गई है!
नारी शक्ति वंदन,और बेटी बचाओ, जैसे वाक्य और कानून अपने घिनौने पन की पराकाष्ठा पर हैं।
बहन, बेटियों पर अत्याचार हो रहा है और देश के नियामक उसमें लाभ हानि ढूंढ रहे हैं, बलात्कार, अनाचार, हिंसा, हत्या जैसे अपराध देवी स्वरूपा पर हो रहे हैं और देश के कर्णधार उसमें राज्य, पार्टी, क्षेत्र, जाति और धर्म ढूंढ रहे हैं।
घटना महत्वपूर्ण नहीं है जहां घट रही है वह महत्वपूर्ण हो गया है, अपराधी महत्वपूर्ण नहीं है उसका धर्म और उसकी राजनीतिक पार्टी महत्वपूर्ण हो गई है।
इन सबके बीच हमारी बहन बेटियां, जो लाडो, लाडली, शक्ति, मां, देवी आदि रूप में संबोधित की जाती है सदियों से पुरुष के पचास ग्राम मांस के लटके हुए लोथड़े, और उसके अहंकार, बलिष्ठ होने के दावे, और पुरुष प्रधान समाज के बनाए नियमों के कारण पीड़िता बन जाती है और वोट, सहानुभूति बटोरने तथा व्यंग, आरोप,और बदला लेने के हथियार के रुप में प्रयुक्त की जाती है।
धन्य है यह भारत भूमि जिसमें नारी आज भी सिर्फ वीर्यभोग्या ही बनी हुई है क्योंकि बाकी सभी अच्छाईयां तो उसे कथित मर्द के दम पर प्राप्त है।
आईए कि जश्न मनाएं कि आज बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, केरल, में महिलाओं पर अपराध हो रहा है। क्योंकि हमें अपराध से घृणा नहीं है। क्योंकि हमनें, इंद्र, सूर्य, से लेकर आज तक स्त्री का तिरस्कार करने वाले को सिर्फ माफ ही नहीं किया है, देवता भी माना है।
✍️ UP 18 NEWS से अखिलेश मौर्या की रिपोर्ट