Friday, August 29, 2025

दुनिय ा मे ं धर्मों की संख्या यू ं तो लगभग 300 से ज्यादा होग ी, लेकिन व्यापक रूप से पांच धर्म ही प्रचलित हैं हिन्दू, जैन, बौद्ध, ईसाई, इस्लाम और सिख। इसके अलावा भी कई और धर्म भी अपना अस्तित्व बनाए रखे हुए हैं तो कुछ अपना अस्तित्व खो चुके हैं। आओ जानते हैं कि वे कौन से धर्म हैं। जो अपना नया साल कब मनाते है

हिंदू नव वर्ष कब है 1. हिन्दू धर्म : हिंदू और जैन धर्म की उत्पत्ति पूर्व आर्यों की अवधारणा में है जो 4500 ईपू. (आज से 6500 वर्ष पूर्व) मध्य एशिया से हिमालय तक फैले थे। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल की शुरुआत 4500 ईपू से मानी है। इस मान से लिखित रूप में आज से 6508 वर्ष पूर्व पुराने हैं वेद। ऋग्वेद को संसार की सबसे प्राचीन और प्रथम पुस्तक माना है। इसी पुस्तक पर आधारित है हिंदू धर्म। (हिंदू नव वर्ष 2024 कब है): सनातन धर्मा हिंदुओं का नया साल 9 अप्रैल 2024 से शुरू होगा। हिंदू पंचांग अनुसार ये विक्रम संवत 2081 होगा। मान्यता है कि भगवान शिव के कहने पर चैत्र शुक्ल पक्ष की पहली तारीख को भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी।

जैन धर्म : दुनिया के सबसे प्राचीन धर्म जैन धर्म को श्रमणों का धर्म कहा जाता है। वेदों में प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि वैदिक साहित्य में जिन यतियों और व्रात्यों का उल्लेख मिलता है वे ब्राह्मण परम्परा के न होकर श्रमण परम्परा के ही थे। मनुस्मृति में लिच्छवि, नाथ, मल्ल आदि क्षत्रियों को व्रात्यों में गिना है।जैन नववर्ष, दीपावली का दूसरा दिन होता है। यह दिन वीर निर्वाण संवत के अनुसार वर्ष की शुरुआत माना जाता है। इस बारे में बहुत ही कम लोगों को विदित है। मान्यतानुसार दीपावली को महावीर स्वामी का निर्वाण हुआ था।भगवान वर्धमान महावीरस्वामीजी के निर्वाण के वर्ष के रूप में 427 ईसा पूर्व का उल्लेख करने वाला सबसे पहला पाठ यति-वृषभ का तिलोय-पन्नति (5 वीं शताब्दी ईस्वी) है। [1] इसके बाद के कार्य जैसे कि जिनेसा के हरिवामसा (783 CE) में वीर निर्वाण युग का उल्लेख है, और इसके और शाका युग के बीच के अंतर को 605 साल और 5 महीने के रूप में बताया।

29 अक्टूबर 1974 को पूरे भारत में जैनियों द्वारा 2400 वां निर्वाण महोत्सव मनाया गया। और विदेश में भी मनाया गया।

सिख धर्म : सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानक। आज से 600 वर्ष पूर्व हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए सिख धर्म की उत्पत्ति हुई थी। इस धर्म के व्यवस्थित रूप दिया गुरु गोविंद सिंह जी ने।सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार होली के दूसरे दिन से नए साल की शुरुआत मानी जाती है. इस साल 25 मार्च को होली है. सिख धर्म के लोगों का नया साल बैसाखी पर्व 13 अप्रैल से शुरू होता है. सिख धर्म के लोग बैसाखी के दिन परंपरा के अनुसार भांगड़ा और गिद्दा (लोक नृत्य) करते हैं

बौद्ध धर्म : ईसाई और इस्लाम धर्म से पूर्व बौद्ध धर्म की उत्पत्ति हुई थी। उक्त दोनों धर्म के बाद यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। इस धर्म को मानने वाले ज्यादातर चीन, जापान, कोरिया, थाईलैंड, कंबोडिया, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और भारत आदि देशों में रहते हैं।बौद्ध संवत : बौद्ध धर्म के कुछ अनुयाई बुद्ध पूर्णिमा के दिन 17 अप्रैल को नया साल मनाते हैं। कुछ 21 मई को नया वर्ष मानते हैं। थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, कंबोडिया और लाओ के लोग 7 अप्रैल को बौद्ध नववर्ष मनाते हैं।बौद्ध पञ्चाङ्ग (पालि: सासन सकरज; बर्मी: သာသနာ သက္ကရာဇ်, खमेर:ពុទ្ធសករាជ ;थाई: พุทธศักราช, आरटीजीएस: phutthasakkarat, [pʰút.tʰá.sàk.kà.ràːt]; सिंहल: බුද්ධ වර්ෂ या සාසන වර්ෂ (बुद्ध वर्ष या सासन वर्ष)) से आशय कम्बोडिया, लाओस, म्यांमार, थाईलैण्ड, श्रीलंका आदि देशों में धार्मिक कार्यों के लिए प्रयुक्त होने वाले कुछ पंचांगों से है। मलेशिया और सिंगापुर में बसे चीनी मूल के लोग भी इस पंचांग का उपयोग करते हैं। यद्यपि इन पञ्चाङ्गों में बहुत कुछ समानता है किन्तु इनमें आपस में कुछ भिन्नताएँ भी हैं, जैसे महीनों के नाम, प्रयुक्त संख्याएँ आदि। ये पंचांग तीसरी शताब्दी में रचित ज्योतिष ग्रन्थ सूर्यसिद्धान्त पर आधारित चान्द्र-सौर पञ्चाङ्ग हैं। दूसरे शब्दों में, ये हिन्दू पंचांग के एक पुराने संस्करण पर आधारित हैं जो नाक्षत्र वर्ष का उपयोग करता है। नाक्षत्र वर्ष में 365.25636 एस आई दिन होते हैं। इस पंचांग का ‘शून्य वर्ष’ महात्मा बुद्ध के परिनिर्वाण दिवस

पारसी धर्म : प्राचीन फारस (आज का ईरान) जब पूर्वी यूरोप से मध्य एशिया तक फैला एक विशाल साम्राज्य था, तब पैगंबर जरथुस्त्र ने एक ईश्वरवाद का संदेश देते हुए पारसी धर्म की नींव रखी दुनियाभर में 16 अगस्त को पारसी समुदाय के लोग अपना नववर्ष पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते है पारसी समुदाय के नववर्ष को नवरोज कहा जाता है. ये त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है, एक 16 अगस्त को और दूसरा 21 मार्च को. दरअसल, नवरोज एक फारसी शब्द है, जो नव और रोज से मिलकर बना है. नवरोज में नव का अर्थ होता है- नया और रोज का अर्थ होता है दिन. इसलिए नवरोज को एक नए दिन के प्रतीक के रूप में उत्सव की तरह मनाया जाता है. ईरान में नवरोज को- ऐदे नवरोज कहा जाता है. पारसी नव वर्ष, पारसी समुदाय के लिए आस्था का विषय है. यह पर्व पारसियों के लिए बेहद खास होता है
नववर्ष यानी नवरोज का उत्सव पारसी समुदाय में पिछले 3 हजार साल से मनाया जाता रहा है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, वैसे तो 1 साल में 365 दिन होते हैं, लेकिन पारसी समुदाय के लोग 360 दिनों का ही साल मानते हैं. साल के आखिरी 5 दिन गाथा के रूप में मनाए जाते हैं. पारसी लोग अपने परंपरा में बंधे हुए हैं. इसका मतलब है कि इन 5 दिनों में परिवार के सभी लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं*
*मान्यताओं के अनुसार, पारसी समुदाय के लोग नवरोज का पर्व राजा जमशेद की याद में मनाते हैं. कहा जाता है कि करीब 3 हजार साल पहले ईरान में शाह जमदेश ने सिंहासन ग्रहण किया था, उस दिन को पारसी समुदाय में नवरोज कहा गया था. आगे चलकर इस दिन को जरथुस्त्र वंशियों द्वारा नए वर्ष के पहले दिन के रूप में मनाया जाने लगा. दुनिया के प्रमुख देश जैसे ईरान, पाकिस्तान, भारत, ताजिकिस्तान, इराक, लेबनान, बहरीन में पारसी नववर्ष को नवरोज के रूप में मनाया जाता है

यहूदी धर्म : आज से करीब 4000 साल पुराना यहूदी धर्म वर्तमान में इसराइल का राजधर्म है। दुनिया के यह यहूदी नववर्ष को चिह्नित करता है। इसकी उत्पत्ति बाइबल (लेव 23ः23-25) से जुड़ी है : एक पवित्र अवसर जो जोरदार धमाकों के साथ मनाया जाता है। रोश हशाना शब्द रैबिनिकल है, जिसका जिक्र साल की शुरुआत के रूप में आता है। इस त्योहार के प्रसंग हैं : प्रायश्चित, दैवीय फैसले के दिन की तैयारी और लाभदायक साल के लिए प्रार्थना। यह दो दिवसीय त्योहार यहूदी कैलंडर में 1-2 तिशरी को मनाया जाता है, जो अंग्रेजी कैलंडर के मुताबिक आमतौर पर सितंबर में पड़ता है। सभी यहूदी त्योहारों की तरह यह भी पिछली शाम से शुरू हो जाता है। रोश हशाना की मुख्य रस्मों में लंबे समय तक चलने वाली एक सिनेगॉग सर्विस के बीच शोफर (बिगुल जैसा वाद्ययंत्र) बजाना और नए साल की खुशी में घरों में तरह-तरह के पकवान बनाना शामिल है। कई मायनों में इजराइल नया साल रोश हशाना से शुरू होता है। सरकारी प्रपत्रों, अखबारों और प्रसारणों में सबसे पहले यहूदी तारीख का जिक्र होता है।प्राचीन धर्मों में से एक यहूदी धर्म से ही ईसाई और इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हुई है। यहूदी एकेश्वरवाद में विश्वास करते हैं। मूर्ति पूजा को इस धर्म में पाप समझा जाता है

ईसाई धर्म : आज से 2 हजार वर्ष पूर्व ईसाई धर्म की उत्पत्ति हुई थी। इस धर्म के संस्थापक है ईसा मसीह। ईसा मसीह का जीवन आज तक विवाद का विषय रहा है। क्या है उनके जीवन की सच्चाई या सच में ही उनका जीवन वैसा ही रहा जैसा कि बाइबिल में बताया जाता है या कि कुछ और।ईसाई नववर्ष*
*इसमें भी एक जनवरी को ही नववर्ष मनाया गया। तब से लेकर अब तक इसी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार पूरे विश्व में एक जनवरी को नववर्ष मनाया जाता हैइ

*इस्लाम धर्म : आज से 14सौं साल पहले इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हज. मुहम्मद अलै. ने की थीं। अल्लाह के हुक्म से हजरत मुहम्मद सल्ल. ने ही इस्लाम धर्म को लोगों तक पहुंचाया है। आप हजरत सल्ल. इस्लाम के आखिरी नबी हैं, आप के बाद अब कायामत तक कोई नबी नहीं आने वाला।इस्लामी नया साल: (नव वर्ष जिसे हिजरी नव वर्ष भी कहा जाता है, वह दिन है जो एक नए चंद्र हिजरी वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, और वह दिन है जिस दिन वर्ष की गिनती बढ़ाया जाता है। मुहर्रम के महीने के पहले दिन अधिकांश मुसलमानों द्वारा इस्लामी वर्ष का पहला दिन मनाया जाता है। इस्लामी युग का युग (संदर्भ तिथि) मुहम्मद और उनके अनुयायियों के मक्का से मदीना प्रवास हिजरत के वर्ष के रूप में निर्धारित किया गया था, जिसे हिजरी के रूप में जाना जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर में 622 सीई के बराबर है। सभी धार्मिक कर्तव्यों, जैसे कि नमाज़, रमजान के महीने में रोज़ा (उपवास), और हज और उम्रह इस्लामिक तीर्थयात्रा और महत्वपूर्ण घटनाओं की तिथियां, जैसे पवित्र रातों और त्योहारों का उत्सव, इस्लामी कैलेंडर के अनुसार गणना की जाती हैं।*

 

इसस्लाम धर्म : आज से 14सौं साल पहले इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हज. मुहम्मद अलै. ने की थीं। अल्लाह के हुक्म से हजरत मुहम्मद सल्ल. ने ही इस्लाम धर्म को लोगों तक पहुंचाया है। आप हजरत सल्ल. इस्लाम के आखिरी नबी हैं, आप के बाद अब कायामत तक कोई नबी नहीं आने वाला।इस्लामी नया साल: (नव वर्ष जिसे हिजरी नव वर्ष भी कहा जाता है, वह दिन है जो एक नए चंद्र हिजरी वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, और वह दिन है जिस दिन वर्ष की गिनती बढ़ाया जाता है। मुहर्रम के महीने के पहले दिन अधिकांश मुसलमानों द्वारा इस्लामी वर्ष का पहला दिन मनाया जाता है। इस्लामी युग का युग (संदर्भ तिथि) मुहम्मद और उनके अनुयायियों के मक्का से मदीना प्रवास हिजरत के वर्ष के रूप में निर्धारित किया गया था, जिसे हिजरी के रूप में जाना जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर में 622 सीई के बराबर है। सभी धार्मिक कर्तव्यों, जैसे कि नमाज़, रमजान के महीने में रोज़ा (उपवास), और हज और उम्रह इस्लामिक तीर्थयात्रा और महत्वपूर्ण घटनाओं की तिथियां, जैसे पवित्र रातों और त्योहारों का उत्सव, इस्लामी कैलेंडर के अनुसार गणना की जाती हैं

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