Friday, August 21, 2026
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आपदा प्रबंधन का पाठ कृषि विभाग किसानों को पढ़ाएगा

 

चिरईगांव/वाराणसी।

जलवायु परिवर्तन के साथ ही समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक आपदाएं, बाढ़, सूखे की स्थिति, आकस्मिक वर्षा, ओलावृष्टि, चक्रवात आदि से फसलों को भारी क्षति होती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। उक्त समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग अब किसान पाठशाला में किसानों को आपदा प्रबंधन का पाठ भी पढ़ायेगा, जिससे किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसलों व स्वयं को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

उत्तर प्रदेश में पहली बार खरीफ मौसम में आयोजित होने वाली किसान पाठशाला में आपदा प्रबंधन के पाठ्यक्रम का समावेश किया गया है। आपदा प्रबंधन के तहत हीटवेव (लू), सर्पदंश से बचाव हेतु सुरक्षा के उपाय, आकाशीय बिजली, आंधी, चक्रवात, तूफान से से बचाव के उपाय किसानों को बताये व समझाये जायेंगे। इसके साथ ही जनपद के सभी आठ विकास खण्डों के प्रत्येक न्याय पंचायत में आयोजित होने वाली किसान पाठशाला में कृषि से सम्बंधित लगभग सभी प्रमुख बिंदुओं पर विभागीय मास्टर ट्रेनर विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे।

किसान पाठशाला का दो दिवसीय पाठ्यक्रम

तैयार- जनपद के उप कृषि निदेशक अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि खराब मौसम में आयोजित होने वाली किसान पाठशाला के लिए प्रदेश स्तर पर ही दो दिवसीय पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। किसान पाठशाला का आयोजन अपराह्न 2.30 बजे से सांय

जनपद की सभी न्याय पंचायतों में चलेगी किसान पाठशाला

प्राकृतिक खेती, पराली प्रबंधन व श्रीअन्न पर होगा खास फोकस

5.30 बजे तक (कुल तीन घंटे) आयोजित किया जायेगा। दो दिवसीय किसान पाठशाला में प्रत्येक दिन डेढ़-डेढ़ घंटे के दो सत्र आयोजित किये जायेंगे। जिसमें 30 मिनट का समय किसानों को दिया जायेगा। जिसमें प्रगतिशील किसान कृषि सम्बंधित अपने अनुभव पाठशाला में उपस्थित अन्य किसानों से साझा करेंगे।

प्राकृतिक खेती के साथ ही श्रीअन्न उत्पादन पर विशेष फोकस: वैसे तो दो दिवसीय किसान पाठशाला के कुल चार सत्रों में खरीफ फसलोत्पादन के तहत धान की सीधी बुआई (डीएसआर), दलहन, तिलहन उत्पादन के साथ ही एफपीओ, कृषि एवं संवर्गीय विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं में किसानों को मिलने वाले अनुदान पर चर्चा होगी, लेकिन प्राकृतिक खेती, पराली प्रबंधन एवं श्रीअन्न उत्पादन की तकनीक एवं डिजिटल क्राप सर्वे पर विशेष फोकस रहेगा। उप कृषि निदेशक ने बताया कि प्राकृतिक खेती के सिद्धांत के साथ ही जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी अर्क, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र पर विशेष फोकस रहेगा। इसके साथ ही औषधीय गुणों की खान (मिलेट्स) बाजरा, ज्वार, सांवा, कोदो, रागी आदि फसलोत्पादन तकनीकी एवं इनके न्यूट्रीशनल एवं श्रीअन्न के औषधीय गुणों को किसानों को समझाया जायेगा।

मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण सम्पन्न उप कृषि निदेशक अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि जनपद में खरीफ मौसम की किसान पाठशाला के संचालन की तैयारी पूरी कर ली गयी हैं। बीते 15 मई को जनपद के सभी मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। शासन स्तर से किसान पाठशाला संचालन की तिथि निर्धारित होते ही किसान पाठशाला का संचालन प्रारंभ किया

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