Friday, August 29, 2025

किसान सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें ग्राम मुस्तफाबाद मे जैविक खेती, कृषि में बांस के कोयले के उपयोग की तकनीक, वन संरक्षण के लिए फलों के पेड़ों और जड़ी-बूटियों की खेती पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

वाराणसी। चिराईगाव । आज दिनांक 22 जून 2024 को ग्राम मुस्तफाबाद स्थित दुर्गा देवी माता जी मंदिर के प्रांगण में एक किसान सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें ग्राम मुस्तफाबा

एनबीद एवं ग्राम चांदपुर के लगभग 150 किसानों ने भाग लिया

हमें आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमने दिसंबर 2023 से उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिले के 3 गांवों (रमना, मुस्तफाबाद और चादपुर) में JICA भागीदारी कार्यक्रम (JPP) परियोजना शुरू की है।

इस परियोजना का शीर्षक ‘वन आधारित गंगा अनुकूल आजीविका परियोजना’ है, जिसका समग्र लक्ष्य गंगा बेसिन के साथ-साथ के गांवों में नदी पर्यावरण के अनुकूल आय सृजन गतिविधियों पर काम करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और फसल के विपणन का उपयोग करने वाली कृषि प्रौद्योगिकी की शुरुआत कर मॉडल पेश करना है।

यह परियोजना जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (JICA) द्वारा समर्थित है और बन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से जापानी समाज सेवी संस्थाOISCA इंटरनेशनल और OISCA उत्तर भारत द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।

सेमिनार के दौरान परियोजना की विषय-वस्तु और उद्देश्यों के बारे में बताया गया। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के महत्व और उनके सतत उपयोग के बारे में जागरूक किया गया। इसके अलावा जैविक खेती, कृषि में बांस के कोयले के उपयोग की तकनीक, वन संरक्षण के लिए फलों के पेड़ों और जड़ी-बूटियों की खेती पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

परियोजना की प्रस्तावित गतिविधियों में से एक पर्यावरण अनुकूल जैविक खेती और जल शोधन के लिए बांस चारकोल का उपयोग करने की तकनीक को भी पेश किया गया है। मार्च के महीने में हमने रमना गाँव में बांस चारकोल के लिए एक भट्ठी का निर्माण किया और इसी तरह की भट्टिया जल्द ही मुस्तफाबाद और चादपुर गाँव में बनाई जाएँगी।

कार्यक्रम का आरंभ सभी अतिथियों का स्वागत ग्राम वासियों के द्वारा माल्यार्पण करके किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन भाषण में सुश्री रितु प्रसाद, निदेशिका, ओइस्का उत्तर भारत ने बताया कि यह परियोजना अभी 4 वर्ष के लिए प्रारंभ की गई है जिसे ग्राम वासियों के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा। सभी का धन्यवाद करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि यह एक सफल परियोजना होगी जिसको मिसाल के रूप में पेश किया जाएगा।

कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में ओइस्का उत्तर भारत के वाराणसी खंड के निदेशक श्री वी. एन. सिंह जी ने कार्यक्रम में पधारे सभी महानुभावों का स्वागत किया और बताया कि इस परियोजना के माध्यम से गांव के किसानों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार आएंगे।

कार्यक्रम में मुस्तफाबाद गांव के प्रधान श्री पारस जी एवं चांदपुर गांव के प्रधान श्री संजय सोनकर जी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और दोनों ही गावों में इस परियोजना का प्रारंभ करने के लिए आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में ओइस्का इंटरनेशनल, जापान के निर्देशक श्री अकीरा मोरिता ने परियोजना का परिचय कराते हुए जापानी संस्था ओइस्का के माध्यम से भारत और जापान के रिश्तों पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जापान एंबेसी से पधारे श्री शुन होसाका, उप सचिव ने बताया कि भारत और जापान के रिश्ते बहुत ही मित्रवत हैं एवं इस प्रकार की परियोजनाओं से इन रिश्तों को और और भी प्रगाढ़ बनाया जा रहा है उन्होंने इस आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद व्यक्त किया

कार्यक्रम में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से पधारी सुश्री तुलिका भट्टाचार्य, NGO Desk Coordinator ने बताया कि जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है लेकिन इस प्रकार की परियोजना वाराणसी में पहली बार प्रारम्भ की गई है। उन्होंने सभी ग्राम वासियों को परियोजना शुरू होने की बधाई दी और भविष्य के लिये शुभकामनाएं व्यक्त की।

बांस के कोयले और मिट्टी की स्थिति में सुधार पर जापानी विशेषज्ञों द्वारा विशेष सत्र लिए गए।
[6/23, 8:15 AM] Shatrughan Singh: कार्यक्रम में जापान से पधारे कृषि विशेषज्ञ श्री आकिओ चिकुडा ने बताया कि स्थिर कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए अच्छी मिट्टी आवश्यक है। अच्छी मिट्टी होने के लिए तीनों गुण शारीरिक, रसायन और जैविक का संतुलन में होना बहुत जरूरी है।

उन्होंने बताया कि अच्छी मिट्टी को बनाए रखने के लिए बांस का चारकोल बहुत ही प्रभावी है बांस के चारकोल के इस्तेमाल से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी, मिट्टी के पोषक तत्व बने रहेंगे। उन्होंने जैविक खाद बनाने की विधि साझा की और खाद बना कर भी दिखाया।

कार्यक्रम में बांस चारकोल के विशेषज्ञ श्री आत्सुशी चिदा ने बताया कि चारकोल मृदा सुधार में पानी की गुणवत्ता सुधार में, वायु सुधार में बहुत ही उपयोगी है।

कार्यक्रम में ओइस्का इंटरनेशनल, जापान से पधारी यूरी यामामोटो, बॉस चारकोल के एक्सपर्ट तदफ्यूमि नाकामुरा, एग्रीकल्चर एक्सपर्ट रयोइची सशो, श्री ओत्सुकि केई, उप सचिव, एंबेसी ऑफ़ जापान, डॉक्टर विज्ञान एवं कृषि, BHU ने भी भाग लिया। अम्लान कुमार घोष प्रोफेसर, भूमि

कार्यक्रम में सभी के लिए अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी। कार्यक्रम के अंत में ओइस्का नॉर्थ इंडिया के कार्यक्रम प्रबंधक रणजीत सिंह चौहान ने सभी का धन्यवाद किया।

धन्यवाद

रनजीत सिंह चौहान, कार्यक्रम प्रबंधक

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