महामहिम राष्ट्रपति के नाम हिंद मजदूर महासभा उत्तर प्रदेश का विशाल प्रदर्शन व जनसभा के पश्चात ज्ञापन
नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) उत्तर प्रदेश
हिंद मजदूर सभा उत्तर प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष आर.पी. सिंह द्वारा दिनांक 9 अगस्त 2024 को भारत छोड़ो दिवस के अवसर पर आयोजित हिंद मजदूर उत्तर प्रदेश द्वारा श्रमिक कानूनो तथा हितों को समाप्त करने के प्रदेश व्यापी विरोध में विशाल प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति महोदया भारत सरकार के नाम ज्ञापन दिया।
ज्ञापन में प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया गया है कि भारत सरकार द्वारा बनाया गया कारखाना अधिनियम 1948 में संशोधन करने हेतु यू.पी. सरकार ने 2 अगस्त 2024 को विधान परिषद में एक प्रस्ताव पारित कराया है। इस प्रस्ताव में व्यवस्था दी गई है कि अब कल कारखानों में श्रमिक 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम करेंगे। वहीं महिला कामगार कर्मियों को रात्रि पाली में श्रम करने का प्रस्ताव किया गया है तथा बोनस संदाय अधिनियम 1965 बोनस न देने वाले मालिकों के गिरफ्तारी में छूट दी गई है। यू.पी. सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों को प्रोत्साहन देने, राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और आर्थिक क्रियाकलापों व नियोजन के अवसर सृजित करने के लिए संशोधन विधेयक लाया गया है।
महोदया, यू.पी. सरकार द्वारा की गई यह कार्यवाही गैर संवैधानिक है। कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 5 का स्पष्ट उल्लंघन है
महोदया, गौर तलब है कि धारा 5 के अनुसार किसी पब्लिक इमरजेंसी की स्थितियों में राज्य सरकारों को कारखाना अधिनियम के कुछ प्रावधानों को मात्र तीन माह के लिए बदलने का अधिकार है। वहीं धारा 5 में स्पष्ट किया गया है कि पब्लिक इमरजेंसी का आशय भारत सरकार की सुरक्षा पर खतरा या भारत सरकार के किसी भाग में युद्ध या आंतरिक डिस्टरवेंस होना है। सभी लोग जानते हैं कि वर्तमान समय में यह स्थिति न तो देश में और नहीं यू.पी. में मौजूद है। बावजूद इसके सिर्फ और सिर्फ कॉर्पोरेट घरानों के मुनाफे को लेकर मजदूरों को आधुनिक गुलामी की ओर धकेलने का प्रबल प्रयास किया गया है।
श्रम का विषय चुंकि भारतीय संविधान की समवर्ती सूची में आता है। उसमें स्पष्ट प्राविधान है कि केंद्र सरकार के किसी भी कानून में यदि राज्य सरकारें संशोधन करती हैं तो उसे भारत के राष्ट्रपति से अनुमति लेना आवश्यक है। ऐसी स्थिति में संगठन आपसे पहली बार निवेदन करता है कि संविधान व आम नागरिकों के जीवन का संरक्षक होने की वजह से आपके संज्ञान में आने वाले कल कारखाना ( यू.पी. संशोधन ) विधेयक 2024 पर हस्ताक्षर न किया जाए। बल्कि उसे उत्तर प्रदेश सरकार को वापस भेजा जाए जिससे मजदूरों को सम्मानजनक जीवन की उत्तर प्रदेश में गारंटी हो सके।
यहां बताना आवश्यक है कि न्यूनतम वेतन का वेज रिवीजन सरकार ने विगत 5 वर्षों से नहीं किया है। उत्तर प्रदेश में 2014 में वेज रिवीजन किया गया था। जिसके तहत अधिनियम 1948 की धारा 3 के तहत अगले 5 वर्ष बाद यानी 2019 में इसे होना चाहिए था। जो आज तक नहीं किया गया है। जो स्पष्ट तौर पर यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 व 43 का उल्लंघन है। जो एक मजदूर के गरिमा मई जीवन की गारंटी करता है। इस उदासीनता के लिए तत्काल उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देशित करने किया जाए कि वह न्यूनतम वेतन वेज के लिए वेज रिवीजन समिति का गठन कर तत्काल वेज रिवीजन को पूरा करें।
पूरे देश में ई – श्रम पोर्टल 28 करोड़ और यूपी में 8 करोड़ से ज्यादा असंगठित मजदूर पंजीकृत हैं। उनकी सामाजिक सुरक्षा हेतु माननीय सुप्रीम कोर्ट बराबर केंद्र सरकार को निर्देशित करता आ रहा है। बावजूद इसके केंद्र की सरकार चुप बैठी हैं। इसमें संगठन ने मांग किया है कि मजदूरों के लिए बीमा, आवास व पेंशन पुत्री विवाह योजना मुफ़्त शिक्षा आदि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को देना सुनिश्चित करें। और वर्ष 2008 में बने असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा कानून तत्काल लागू किया जाए। घरेलू कामगारों के लिए केंद्रीय कानून बनाया जाए और निर्माण मजदूरों के लिए हर शहर में विश्राम गृह और मजदूर अड्डों पर न्यूनतम सुविधाओं से युक्त सेड की गारंटी की जाए।
नियमित प्रकृति के कामों में बड़े पैमाने पर संविदा आउटसोर्सिंग ठेका मजदूरों को रखा जाता है। जो ( विनिमय तथा उत्पादन ) अधिनियम 1970 की धारा 10 का खुला उल्लंघन है। इनको समान काम का समान वेतन नहीं दिया जाता है। इस गैर कानूनी ठेका प्रथा को समाप्त किया जाए। और जो लोग अभी संविदा के तहत कार्यरत हैं उन्हें नियमित करने का निर्देश दिया जाए।
मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए आंगनवाड़ी, आशा, मिड डे मील, वर्कर जैसे स्कीम वर्करों को राज्य कर्मचारी घोषित करके उनके सम्मान जनक मानदेय की गारंटी की जाए।
हर नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार की गारंटी दी जाए, देश में खाली पड़े सभी सरकारी पदों पर तत्काल भर्ती कराया जाए। और संसाधनों के लिए देश के कॉर्पोरेट घरानों और उच्च धनाढ्य व्यक्तियों की संपत्ति पर टैक्स लगाया जाए जो राष्ट्र के काम आ सके।