देव-दीपावली पर हज़ारों दीपों के साथ जगमगाया ‘क्रीं-कुण्ड’
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक़ कार्तिक माह की पूर्णिमा का बड़ा महत्व है । शैव-वैष्णव, सिख, जैन सहित अनेक परंपराओं-मान्यताओं में कार्तिक पूर्णिमा की प्रबल महत्ता है । कहते हैं कि इसी दिन भगवान शिव ने एक महाभयानक राक्षस, त्रिपुरासुर, का अंत किया था । माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव के दर्शन करने से महापुण्य की प्राप्ति होती है । इसके अलावा इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दीप-दान की प्रक्रिया को भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है । दीपावली के बाद रौशनी के इस सबसे बड़े पर्व को कहीं कार्तिक पूर्णिमा तो कुछ लोग देव-दीपावली कहते हैं । भगवान शिव की नगरी काशी में देव दीपावली यानि कार्तिक पूर्णिमा की छठा देखते ही बनती है । काशी के घाट करोड़ों दियों से जगमगाते रहते हैं । इस दिन काशी के मठ-मंदिर की भव्यता बेमिसाल होती है । इसी कड़ी में काशी के रविन्द्रपुरी में स्थित विश्वविख्यात अघोरपीठ, ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ में हज़ारों श्रद्धालुओं ने दीप-दान कर, बाबा कीनाराम जी सहित, सभी समाधियों का दर्शन पूजन किया । ‘क्रीं-कुण्ड’ के प्रवेश द्वार से लेकर पूरा परिसर, हज़ारों दीपों की रौशनी से, जगमगा रहा था । सड़क पर आते-जाते लोग भी अघोरपीठ के परिसर के बाहर रुक कर, परिसर में, जगमगाती रौशनी को निहार रहे थे । कई लोग, दीपों में नहाए इस परिसर की फ़ोटो लेते भी दिखाई पड़े ।
संजय सिंह
मीडिया प्रभारी
‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’