अवैध रूप से काटी जा रहीं चार पहिया गाड़िया पलक झपकते कबाड़ में तब्दील हो जाते हैं लग्जरी वाहन जिम्मेदार मौन कबाड़ की दुकान पर कटने के लिए खड़े वाहन
*वाराणसी/-देश के विभिन्न प्रांतों से आए लक्जरी वाहन तथा मालवाहक हाईवे किनारे पलक झपकते ही गैस कटर से काटकर कबाड़ में तब्दील कर दिए जाते हैं।रोहनिया के अखरी से लेकर मिर्जामुराद के कछवारोड तक खुलीं अनाधिकृत दुकानों पर यह कार्य धड़ल्ले से चल रहा है।वाहनों के अवशेष को जलाकर वातावरण भी प्रदूषित किया जा रहा है।पुलिस-प्रशासन इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।दिन-रात चलता है वाहनों के काटने का सिलसिला रोहनिया से मिर्जामुराद के हाईवे किनारे कई कबाड़ की दुकानें बेरोकटोक संचालित हो रही हैं।इन पर रोजाना पुराने वाहन काटे जा रहे हैं।
कबाड़ की दुकानें चोरों के लिए मुफीद होती हैं।इन्हीं पर वे चोरी के वाहन व सामान भी लाकर बेचते हैं।अखरी स्थित अमरा बाई पास पर आतिथ्य रेस्टोरेंट के समीप दर्जनों चार पहिया वाहन कटने के लिए खड़ी नजर आई जो आरटीओ से मिले एनओसी के बगैर काटी जा है जिसके बाबत रोहनिया पुलिस सहित हर क्षेत्र के पुलिकर्मियों द्वारा कोई कार्यवाही नही की जाती उसी रास्ते पुलिस कर्मी,थाने के इंस्पेक्टर,सब इंस्पेक्टर आते जाते हैं लेकिन रुककर कार्यवाही करना मुनासिब नही समझते।*
*कबाड़ी बिना किसी परमिशन कबाड़ में तोड रहे है वाहन आरटीओ है बेखबर निर्धारित शुल्क का हो रहा नुकसान*
*नियमानुसार आरटीओ से लेना होती है परमिशन,निर्धारित शुल्क भी जमा करना अनिवार्य होती है,तोडकर वाहन के पुर्जे अलग अलग बेच दिए जाते हैं*
*ग्रामीण क्षेत्र में कई कबाड़ियों की दुकान हैं।जो बिना अनुमति पुराने वाहन कम दामों में खरीदकर वाहन तोडकर बेच रहे हैं।इस तरह कबाडियों द्वारा शासन को लाखों रुपए का चूना लगाया जा रहा है।यह देखने में आ रहा है कि कबाडियों द्वारा गाडी मालिक से कम कीमत में वाहन खरीद कर उसे परिसर में तोडकर वाहन के पुर्जे अलग अलग बेच दिए जाते हैं।शासन के नियमानुसार किसी भी पुराने कंडम वाहन को तोडने से पहले उसकी अनुमति परिवहन विभाग से प्राप्त करना होती है।जिसके लिए सबसे पहले पंजीयन विभाग में आरसी की प्रति के साथ एक आवेदन देना होता है।आवेदन प्राप्त होने के बाद परिवहन विभाग उक्त गाडी का निरीक्षण कर वाहन तोडने की अनुमति देता है।शासन के नियमानुसार यदि कोई वाहन जो निजी उपयोग का है।उक्त वाहन तोडने की अनुमति के लिए परिवहन विभाग में आवेदन दिया जाता है,आवेदक को वाहन के हिसाब अनुसार दो सौ रुपए से लेकर हजार रुपए तक शासन को पंजीयन निरस्त करने की अनुमति शुल्क का प्रावधान है। जिसे परिवहन विभाग जमा करने के उपरांत अनुमति प्रदान करता है।*
*व्यावसायिक वाहनों का भरना होता है टैक्स*
*शासन के नियमानुसार यदि कोई वाहन व्यावसायिक उपयोग का है तो वाहन फिटनेस कमर्शियल टेक्स, परमिट का पैसा आदि अनुमति प्राप्त करने की तिथि तक परिवहन विभाग को अदा करना होता है। जिसके उपटांत परिवहन विभाग द्वाटा अनुमति जाटी की जाती है।*
*फीस के अलावा मांगी जाती है अतिरिक्त राशि*
*इस संबंध में एक गाड़ी तोड़ने वाले से जब जानकारी ली गई तो बताया कि स्क्रैप की गाडी तोड़ने में अनुमति प्राप्त करना होता है। उन्होंने बताया जितने रुपए में हम लोग कबाड़ में वाहन खरीद के लाते हैं उससे कहीं अधिक टाशि स्क्रैप की अनुमति लेने में लग जाती है इस कारण हम विला अनुमति के वाहन तोड़ते है।*
*परिवहन विभाग नहीं करता कार्यवाही*
*सूत्रों की मानें तो इस संबंध में परिवहन विभाग द्वारा लंबे समय से कार्यवाही नहीं की गई है।जिसके चलते कबाड़ियों के हौसले बुलंद है।ऐसी स्थिति में चोरी हुई गाड़िया अथवा कोई ऐसा वाहन जिसके द्वारा कोई बड़ी दुर्घटना की गई है वह भी तोडकर विक्रय किया जा सकता है।*
*केंद्र की योजना भी हुई विफल*
*केंद्र सरकार द्वाटरा नई स्क्रेप नीति के अंतर्गत योजना बनाई गई है।जिसमें कोई भी व्यक्ति अपना पुराना वाहन शोरूम में जाकर कटवा कर वहीं नम्बर अपने नए वाहन के लिए ले सकता है।इस योजना में उपभोक्ताओं में किसी प्रकार की कोई रुचि देखने को नहीं मिल रही है।कबाडियों द्वारा कम दामों पर विना अनुमति कंडम या दुर्घटनाग्रस्त वाहन खटीद कर वाहन तोड़ने का काम वर्षों से किया जा रहा है।लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा आज तक इनकी जांच नहीं की गई।जिससे प्रतीत होता है कि कहीं परिवहन विभाग के अधिकारियों से कबाडियों की मिली भगत तो नहीं है।*