Friday, August 29, 2025

राजनीतिक पार्टियां ब्राह्मणों का विरोध करवा के कही आपका धर्मांतरण तो नहीं करना चाहती काली शंकर उपाध्याय की कलम से

राजनीतिक पार्टियां ब्राह्मणों का विरोध करवा के कही आपका धर्मांतरण तो नहीं करना चाहती काली शंकर उपाध्याय की कलम से

वर्तमान समय में आजकल एक फैशन सा चला हुआ है कि ब्राह्मणों का विरोध करो और राजनीति करो लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे क्या राज है आइए हम बताते है अपने इस लेख में ब्राह्मणों का विरोध करवा के सबसे पहले तो राजनीतिक पार्टी सत्ता में आना चाहती है और अपने गाड़ी पर बैठना चाहती है जिससे कि वह सट्टा का भरपूर लाभ उठा सके और समाज में एक विद्रोह पैदा हो जिससे कि जो हिंदू समाज एकजुट होकर आपस में भाईचारा की जिंदगी जी रहा है उसमें बटवारा हो जाए और लोग एक दूसरे को द्वेष की दृष्टि से देखने लगे लेकिन इसका शिकार ब्राह्मण ही क्यों इसके बारे में हम बताते हैं आपको ब्राह्मण हिंदू धर्म में वेद पूजा पाठ संस्कृत धर्म के बारे में लोगों को बताना न्याय क्या है अन्य क्या है यह शुरू से ही ब्राह्मण लोगों को बताते आए हैं और हिंदू धर्म का सबसे बड़ा पिलर ब्राह्मण को ही माना जाता है ब्राह्मण का विरोध करेंगे तभी हिंदू धर्म को कमजोर करेंगे और तभी ज्यादा से ज्यादा लोगों को दूसरे धर्म में परिवर्तित करेंगे सूत्रों की माने तो धर्मांतरण करने वाले लोगों को दूसरे धर्म के लोग अच्छी खासी मोटी रकम भी देते हैं तो राजनीतिक पार्टियों को ऊपर से मोटी रकम भी धर्मांतरण कराने में मिल जाती है जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनको बोलकर लोगों को ब्राह्मण के खिलाफ भड़काया जाता है कि ब्राह्मणों ने लोगों को जाति में बनता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं है ना ब्राह्मणों ने किसी को जाति में बनता है और नहीं ऐसी कोई बात है एक समय ऐसा भी आया था कि लोग रोजगार के लिए परेशान थे तो उसे समय सभी लोगों की एक बैठक हुई जिसमें जो जी कुशल काम में था उसे उसे काम को दिया गया और उसे समय यह विधायक भी दी गई कि जिसका जो काम है वही वह काम करेगा विश्वकर्मा है तो फर्नीचर का काम करेंगे ना ही है तो बोल काटेंगे चौरसिया है तो पान की पान का व्यापार करेंगे यह बहुत दिनों से चला आ रहा है उसे समय लोगों को जातियों के हिसाब से नहीं बनता गया था कर्म के आधार पर बांटा गया था ताकि लोगों को नौकरी यानी कि जॉब बोलते हैं जॉब मिल जाए ताकि किसी को रोजी रोटी के लिए भटकना न पड़े और अभी इस तरीके से अफवाह फैलाई जाती है कि ब्राह्मणों ने लोगों को जातियों बांटा ब्राह्मणों का विरोध करवरकर हिंदू धर्म को खत्म करने के इरादे से राजनीतिक पार्टियों खुद सत्ता में बैठेगी और सट्टा की मलाई कटेंगे और धर्मांतरण करा की भी मोटी रकम कमाएंगी इनका उद्देश्य सिर्फ इतना है समझने वाले अगर समझ जाए तो ठीक है नहीं तो समय ऐसा भी आएगा कि समझने के लिए भी समय नहीं रहेगा

ब्राह्मणों का इतिहास

धार्मिक प्रतिष्ठा के अपने इतिहास और शिक्षा की परंपरा के साथ, ब्राह्मण समाज में एक उच्च स्थान रखते हैं। वे ब्रिटिश उपनिवेशवाद से पहले, ब्रिटिश राज (1858-1947) के दौरान, और फिर कांग्रेस पार्टी और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रवादी आंदोलन का नेतृत्व करते हुए, भारत के इतिहास में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली रहे हैं।

भारत में जाति व्यवस्था प्राचीन है, जो कम से कम 3,000 वर्षों से अस्तित्व में है। यह व्यवस्था एक वंशानुगत सामाजिक पदानुक्रम है जो किसी व्यक्ति के पेशे, उपयुक्त विवाह साथी और स्वीकार्य सामाजिक संपर्कों को निर्धारित कर सकती है। हालाँकि जातियाँ मूल रूप से केवल हिंदू लोगों पर लागू होती थीं, लेकिन आज, किसी भी धर्म के भारतीय लोग किसी न किसी जाति से पहचान रखते हैं।

 

पदानुक्रम के शीर्ष पर ब्राह्मण हैं। इस जाति का इतिहास वैदिक काल से शुरू होता है, 1500 और 600 ईसा पूर्व के बीच जब जाति व्यवस्था पहली बार विकसित हुई थी। इस समय के दौरान रचित पवित्र ग्रंथ हिंदू धर्म और संस्कृति में महत्वपूर्ण बने हुए हैं; वे इस अवधि के ज्ञान के लिए जानकारी रखने वाले महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। प्राचीन वैदिक धर्म ने आधुनिक हिंदू धर्म को आकार देने में मदद की, हालाँकि उनके बीच उल्लेखनीय अंतर हैं।

 

जाति पदानुक्रम में, प्रत्येक जाति की अपनी प्राथमिक भूमिका होती है:

 

आइए मैं समझाता हूं दलित और मुस्लिम ब्राह्मण के पीछे क्यों पड़े हैं?

ध्यान पूर्वक पढ़े और समझे, क्यूंकि ये बेहद महत्व्यपूर्ण जानकारियां है, समझने की कोशिश करें, अगर समझ जायेंगे तो माथा ठनक जायेगा ।

नफरत सिर्फ ब्राह्मणों के खिलाफ क्यों फैलाई जाती है ? नफरत यादव, सुनार, धोबी, कुम्हार, कुशवाहा या बाकी जातियों के खिलाफ क्यों नहीं फैली ? ये एक वाजिब प्रश्न है । सुनिए जरा.

अगर आप यादव से नफरत करेंगे तो उससे दूध लेना बंद कर देंगे; पर फिर भी हिन्दू रहेंगे, अगर आप सुनार से नफरत करेंगे तो उससे आभूषण बनवाना बंद कर देंगे; पर फिर भी आप हिन्दू रहेंगे, अगर आप धोबी कुशवाहा ,कुम्हार से नफरत करेंगे तो कपड़े धुलवाना ,सब्जी लेना,और बर्तन खरीदना बंद कर देंगे; पर फिर भी आप हिन्दू रहेंगे पर अगर आप ब्राह्मण से नफरत करेंगे तो आप सभी धार्मिक रस्मों जैसे कि जन्म, शादी, मृत्यु , गृह पूजन ,इत्यादि के लिए उसके पास जाना बंद कर देंगे और जब आपको इन सभी रस्मों को करवाने की जरुरत पड़ेगी तब आप क्या करेंगे ? तब ये सब रस्में आकर चर्च का पादरी करेगा, आगे समझिये

ब्राह्मणों से नफरत करना यानी ब्राह्मण विरोधी 2000 साल पुराने जोशुआ प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसका एजेंडा पूरे हिंदुस्तान को ईसाई व मुस्लिम मुल्क बनाना है । हिंदुओं का धर्मान्तरण तब तक नहीं हो सकता जब तक वे ब्राह्मणों के संपर्क में है

अभी सभी हिन्दुओ के खिलाफ इन्होने जिहाद छेड़ दिया, सभी हिन्दू को गाली देने लगे तो सभी हिन्दू एक हो जायेगा और इनको तबाह कर देगा, तो इन्होने जेशुआ प्रोजेक्ट बनाया जिसके तहत हिन्दू जातियों में ब्राह्मणों के लिए इतनी नफरत बढ़ाओ की अन्य हिन्दू ब्राह्मणों के पास किसी भी काम के लिए जाना बंद कर दें और धर्मान्तरण के दरवाजे खुल जाएं

सबसे पहले ईसाई मिशनरी रॉबर्ट काल्डवेल्ड ने आर्यन द्रविड़ियन थ्योरी बनाई ताकि दक्षिण भारतीयों को अलग पहचान देकर धर्मान्तरण किया जाए जिसमे उत्तर भारतीयों को ब्राह्मण आर्यन दिखाया गया, इनकी एजेंडा यहां खत्म नहीं हुआ इसके बाद दूसरे मिशनरी और संस्कृत विद्वान जॉन म्योर ने मनुस्मृति को एडिट किया, इसमें वामपंथियों ने मदद की

ब्राह्मण विरोध, सनातन विरोध का ही छद्म नाम है। क्योंकि ब्राह्मणवाद, मनुवाद तो बहाना है; असली मकसद हिन्दू धर्म को मिटाना था

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