वाराणसी
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों में मरीजों से पैसे वसूलने की शिकायतों पर अब प्रशासन सख्त हो गया है। शनिवार को राइफल क्लब में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) हिमांशु नागपाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नियमों के उल्लंघन पर न केवल राज्य स्तरीय सम्बद्धता, बल्कि जिला स्तरीय पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है।
सीडीओ ने बताया कि अब तक 26 लाभार्थियों ने अस्पतालों द्वारा पैसे लिए जाने की शिकायत की है। इनमें से 20 मरीजों को राशि वापस कराई जा चुकी है, 3 मामलों की प्रक्रिया चल रही है जबकि 3 गंभीर मामलों को स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज़) को भेज दिया गया है।
हेरिटेज, गैलेक्सी और हेल्थ सिटी अस्पतालों के खिलाफ भी शिकायतें मिलने पर राज्य स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सीडीओ ने कहा कि सभी लाभार्थियों को नियमानुसार नि:शुल्क इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए। यदि मरीजों से पैसे लिए जाते हैं, तो अस्पतालों को तत्काल राशि वापस करनी होगी, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
📋 डिस्प्ले और पारदर्शिता के निर्देश:
सीडीओ ने यूपी क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) नियम 2016 के तहत सभी अस्पतालों को निर्देशित किया कि:
मुख्य द्वार पर डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए जिसमें:
अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नंबर, संचालक का नाम, बेड संख्या, चिकित्सा पद्धति, उपलब्ध सेवाएं और स्टाफ विवरण हो।
बोर्ड का बैकग्राउंड पीला और लिखावट काले रंग में होनी चाहिए।
साथ ही, शिकायत पेटिका भी अनिवार्य रूप से लगाई जाए।
🕒 शिकायत निवारण प्रक्रिया:
यदि कोई लाभार्थी जिला शिकायत निवारण समिति के फैसले से असंतुष्ट है, तो वह 30 दिन के भीतर राज्य समिति (SGRC) के समक्ष अपील कर सकता है।
इस बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी, एसीएमओ एसएस कन्नौजिया, डॉ. पीयूष राय, डीजीएम सागर कुमार, नावेन्द्र सिंह सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे