Friday, August 21, 2026
No menu items!
No menu items!

जब असम के राज्यपाल बनें श्रद्धांजलि के वाहक:

जब असम के राज्यपाल बनें श्रद्धांजलि के वाहक:

राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने किया स्वतंत्रता सेनानी पं. श्रीराम शर्मा आचार्य स्मृति द्वार का लोकार्पण – चकिया की माटी को किया नमन

 

चकिया (8 अगस्त 2025) –

आज का दिन चकिया के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा, जब असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण आचार्य स्वयं यहां पधारे और स्वतंत्रता सेनानी पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के नाम पर निर्मित भव्य स्मृति द्वार का लोकार्पण किया। यह महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र और मातृभूमि के प्रति उनके गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक था।

 

गायत्री मंदिर परिसर में राज्यपाल ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर ASP सहित जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी आयोजन की तैयारियों में जुटे रहे। स्थानीय जनता का उत्साह देखते ही बनता था – मानो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियाँ फिर से जीवंत हो उठीं हों।

 

राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य का यह दौरा आम जनमानस से जुड़ने की एक मिसाल बन गया। उन्होंने न केवल स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि चकिया की पुण्यभूमि को भी नमन किया। यह क्षण न सिर्फ चकिया, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया है।

 

 

यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मातृभूमि और उसके वीर सपूतों के प्रति राज्यपाल जी की गहरी भावनात्मक निष्ठा का प्रतीक है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर बने स्मारक का उद्घाटन करना और उनकी कर्मभूमि को नमन करना – यह कदम जनसेवा और जनसंवेदना के बीच सेतु बनाता है।

 

ब्यूरोक्रेसी भी इस सादगी और संवेदनशीलता से भरे दौरे की सराहना कर रही है। राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य का यह प्रयास बताता है कि लोकतंत्र केवल सत्ता नहीं, संस्कार भी होता है। और जब शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्ति जड़ों से जुड़ते हैं, तो पूरे प्रशासनिक तंत्र में एक नई ऊर्जा का संचार होता है।

 

चन्दौली से ~ तारकेश्वर पाण्डेय की रिपोर्ट

escort bayan sakarya escort bayan eskişehir