वाराणसी, दिनांक: 23 अक्टूबर 2025
मृतका अनाया रिजवान की मां, आफरीन बानो की ओर से शशांक शेखर त्रिपाठी व अन्य अधिवक्ताओं ने माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी श्री मनीष कुमार की अदालत मे मुकदमा दाखिल किया.
और उनके पक्ष को न्यायालय में मजबूती से प्रस्तुत किया। यह मामला एक गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही और सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ा है, जिसमें 7 वर्षीय मासूम अनाया रिजवान की रेटिना सर्जरी के दौरान हुई संदिग्ध मृत्यु की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
इस प्रकरण में अनाया की माँ आफरीन बानो का कहना है कि 14 अक्टूबर 2025 को जब बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में ASG Eye Hospital, वाराणसी में भर्ती कराया गया था, उस समय सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया की मात्रा, मॉनिटरिंग और आपातकालीन प्रबंधन में गंभीर त्रुटियां हुईं। इन लापरवाहियों के परिणामस्वरूप बच्ची की असमय मृत्यु हो गई, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तथ्यों को छिपाने, झूठे आश्वासन देने और मामले को दबाने का प्रयास किया।
न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में साक्ष्य छिपाने एवं षड्यंत्र रचने में चिकित्सकीय और प्रशासनिक जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका को उजागर किया गया है। आरोपियों में ASG Eye Hospital के वरिष्ठ नेत्र सर्जन सहित अन्य चिकित्सा कर्मचारी, Matcare Maternity & Child Hospital के निदेशक एवं संबंधित व्यक्ति शामिल हैं।
माननीय न्यायालय ने इस गम्भीर मामले में प्रार्थना पत्र दर्ज करते हुए संबंधित थाना भेलूपुर को आगामी *28 अक्टूबर 2025* को न्यायालय में आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। न्यायालय का यह आदेश पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण और आशास्पद कदम है।
इस अवसर पर अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा,
> “यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि चिकित्सा प्रणाली की जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न है। सात वर्ष की मासूम बच्ची की मौत किसी भी तरह मात्र एक दुर्घटना नहीं मानी जा सकती। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो और न्यायालय के समक्ष सच्चाई सामने आए। आफरीन बानो और उनकी बेटी अनाया के लिए हमारा संघर्ष न्याय पूर्ण होने तक जारी रहेगा।”
वहीं मृतका की मां आफरीन बानो ने अपनी संवेदनापूर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा,
> “मुझे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। मैं अपनी मासूम बेटी की आत्मा की शांति के लिए तब तक संघर्ष करती रहूंगी जब तक उन सभी लोगों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाएगा, जिनकी लापरवाही, गैरजिम्मेदारी और गलत प्रबंधन की वजह से मेरी बेटी की जान गई।”
न्यायालय के आदेश का अधिवक्ता दल ने स्वागत किया है और अपेक्षा जताई है कि जांच एजेंसी पारदर्शी, निष्पक्ष और शीघ्र जांच सुनिश्चित करेगी, ताकि पीड़िता के परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
वाराणसी सरफराज अहमद





