Thursday, February 26, 2026

स्कूल जाने वाले बच्चे 24 KM साइकिल चलाने या नावसे खतरनाक सफर के लिए मजबूर;

वाराणसी.जाहलूपुर.स्कूल जाने वाले बच्चे 24 KM साइकिल चलाने या नावसे खतरनाक सफर के लिए मजबूर;

नाविक निःशुल्क सेवा कर रहा वाराणसी: गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने चिरईगाँव ब्लॉक अंतर्गत जाहलुपुर,अम्बा सोता और मोकलपुर गाँवके निवासियों के समक्ष गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। मुख्य सड़क मार्ग के डूब जाने से ग्रामीणों का दैनिक आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे खासकर स्कूली बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ रहा है।

 

गाँव के निवासी श्री भुआल सिंह प्रदुमन सिंह पवन तिवारी पपु तिवारी ने बताया कि जाहलुपुर से मोकलपुर जानेवाला मुख्य रास्ता पानी में डूब चुका है।उन्होंने कहा हमारा सीधा रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध है। हमलोग नाव से पार होने को मजबूर हैं, या फिर 12 से 24 किलोमीटर तक घूमकर जाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रधान, विधायक और लेखपाल को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है।बच्चों के लिए सफर 24 किलोमीटर की चुनौती

स्कूली छात्रों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि 24 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर स्कूल जाना लगभग असंभव है, जिसके कारण वे नाव से जोखिम भरा सफर करने के लिए मजबूर हैं। छात्रों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समाधान की मांग की है।

नाविक नारद निषाद की निःस्वार्थ सेवा

इस मुश्किल समय में, गाँव के ही नाविक श्री नारद निषाद ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए संकटमोचक बने हुए हैं। उन्होंने बताया, “मैं अपनी नाव से बच्चों और गाँव की जनता की सेवा कर रहा हूँ।बच्चों से मैं कोई किराया नहीं लेता।”

 

हालांकि, उन्होंने पंचायत राज व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल उठाया। नारद निषाद ने बताया कि इस महत्वपूर्ण जनसेवा के लिए उन्हें सरकार या पंचायत द्वारा कोई मानदेय नहीं मिलता है। उन्होंने प्रश्न किया कि आपदा काल में जीवन को जोखिम में डालकर सेवा कर रहे नाविकों को क्या उनके काम का मानदेय (वेतन) मिलना नहीं चाहिए?

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस डूब चुके मार्ग पर तत्काल आवागमन की सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने और नाविक नारद निषाद की निःस्वार्थ सेवा के लिए उन्हें मानदेय देने की मांग की है।

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