Thursday, February 26, 2026

लाखों खर्च के बाद भी प्रकोप: चिरईगाँव ब्लाक के 4 गाँवों में मच्छरों का ‘महाप्रकोप’, डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा!

चिरईगाँव, जाहलूपुर न्याय पंचायत।शीतलहर की दस्तक के बावजूद चिरईगाँव ब्लाक के अंतर्गत आने वाले जाहलूपुर न्याय पंचायत क्षेत्र के कई गाँवों में मच्छरों का प्रकोप अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। जाहलूपुर, रामचंदीपुर, मोकलपुर, और गोबरहा जैसे प्रमुख गाँवों में स्थिति अत्यंत गंभीर है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं और उनका जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

​तहसीलदार सिंह. दुर्गाप्रसादसिंह प्रदुमन सिंह अमित सिंह जंगाली गोंड प्रदीप तिवारी अन्य ग्रामीण का आरोप है कि ब्लाक प्रशासन ने मच्छर नियंत्रण पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद मच्छरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद भी नियमित फॉगिंग नहीं हो रही है, और सफाई कर्मियों को दी गई फॉगिंग की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से नहीं निभाई जा रही है। हर गली-बाज़ार और पानी के ठहराव वाले स्थानों पर मच्छरों की ब्रीडिंग जारी है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है।

​📉 प्रशासन के दावे बनाम ज़मीनी हकीकत

​स्थानीय निवासियों के अनुसार, समस्या की जड़ नालियों की खराब सफाई और जल निकासी की समस्या है, जो मच्छरों को पनपने के लिए अनुकूल माहौल दे रही है।

​”ब्लॉक से दावा किया जाता है कि लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन हमारे गाँव में हफ्तों तक फॉगिंग मशीन नहीं दिखती। हम बीमारी के डर से रात भर सो नहीं पाते और बच्चों को खतरा है।”

– गोबरहा और मोकलपुर के निवासियों का बयान

​🎙️ अधिकारी का पक्ष: ADO पंचायत ने दिए तत्काल निर्देश

​इस गंभीर शिकायत पर प्रशासनिक कार्रवाई जानने के लिए जब अवर विकास अधिकारी (पंचायत) कमलेश सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें गाँवों में मच्छरों के प्रकोप की सूचना है।

​ADO पंचायत कमलेश सिंह ने कहा, “मैं तुरंत सभी सफाई कर्मियों से बात करता हूँ और उन्हें फॉगिंग करवाने के लिए निर्देश देता हूँ। जल-जमाव वाले स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।”

​अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही इन सभी गाँवों में सघन फॉगिंग अभियान शुरू किया जाएगा ताकि मच्छरों के प्रकोप को नियंत्रित किया जा सके।

​ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन केवल निर्देश देने के बजाय जमीनी स्तर पर काम की निगरानी सुनिश्चित करे, अन्यथा लाखों का सरकारी बजट खर्च होता रहेगा और लोगों को बीमारियों से जूझना पड़ेगा।

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