Thursday, February 26, 2026

भागीरथी वृद्ध आश्रम: बुजुर्गों के लिए सम्मान और सेवा का एक पावन द्वार

भागीरथी वृद्ध आश्रम: बुजुर्गों के लिए सम्मान और सेवा का एक पावन द्वा

वाराणसी, जिसे हम धर्म, संस्कृति और मोक्ष की नगरी के रूप में जानते हैं, आज मानवीय संवेदनाओं की एक नई मिसाल पेश कर रहा है। शहर की कोलाहल से दूर, चिरईगांव ब्लॉक के मुड़ली पियरी ग्राम सभा में स्थित ‘भागीरथी वृद्ध आश्रम’ उन बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित बसेरा बन गया है, जिन्हें जीवन की सांध्य बेला में अपनों के साथ और सम्मान की सबसे अधिक प्रतीक्षा रहती है।

एक पुनीत संकल्प: शालिनी मेमोरियल सेवा संस्थान

इस आश्रम का संचालन शालिनी मेमोरियल सेवा संस्थान द्वारा किया जा रहा है। संस्थान का मूल विजन केवल एक छत प्रदान करना नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों को ‘परिवार’ का अहसास कराना है जो किन्हीं कारणों से अकेले रह गए हैं। ‘भागीरथी’ नाम गंगा की उस अविरल धारा का प्रतीक है जो निस्वार्थ भाव से जीवन देती है; ठीक उसी तरह यह संस्थान भी बुजुर्गों की सेवा को एक आध्यात्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी मानता है।

आधुनिक सुविधाएं और पारिवारिक वातावरण

संस्थान ने मुड़ली पियरी में 25 बुजुर्गों के निवास के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया है। यहाँ दी जाने वाली सुविधाएं केवल भौतिक जरूरतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बुजुर्गों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाता है:

* सात्विक आहार: वृद्धों की आयु और स्वास्थ्य के अनुरूप ताजा, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था।

* चिकित्सा सुरक्षा: नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए संस्थान सदैव तत्पर रहता है।

* आध्यात्मिक शांति: भजन, कीर्तन और सत्संग के माध्यम से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक वातावरण प्रदान किया जाता है।

* सराहनीय आवास: स्वच्छ, हवादार और प्रकाशमय कमरों की व्यवस्था, जो उन्हें घर जैसा अनुभव देती है।

रिक्त स्थान: सेवा के लिए खुला निमंत्रण

वर्तमान में, भागीरथी वृद्ध आश्रम में 5 बुजुर्ग पूरी गरिमा के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। संस्थान की कुल क्षमता 25 व्यक्तियों की है, जिसका अर्थ है कि अभी भी 20 स्थान रिक्त हैं। संस्थान के संचालक और प्रशासन उन असहाय या एकाकी जीवन जी रहे बुजुर्गों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं, जिन्हें वास्तव में स्नेहिल देखभाल की आवश्यकता है।

प्रबंधन और पारदर्शिता

किसी भी सामाजिक संस्था की सफलता उसकी पारदर्शिता पर टिकी होती है। संस्थान की वित्तीय व्यवस्था और प्रबंधन की कमान कोषाध्यक्ष आशा दीक्षित जी के हाथों में है। उनके कुशल नेतृत्व में आश्रम का एक-एक संसाधन बुजुर्गों की सेवा में समर्पित है।

> संपर्क सूत्र: यदि आप किसी ऐसे बुजुर्ग को जानते हैं जिन्हें मदद की दरकार है, या आप इस पुनीत कार्य में योगदान देना चाहते हैं, तो 9415017664 पर आशा दीक्षित जी से संपर्क कर सकते हैं।

निष्कर्ष: हमारी सामाजिक जिम्मेदारी

बुजुर्ग हमारे समाज की नींव और अनुभवों की धरोहर हैं। शालिनी मेमोरियल सेवा संस्थान का यह प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणा है। हमारा यह सामूहिक दायित्व है कि हम इस जानकारी को जन-जन तक पहुँचाएं ताकि मुड़ली पियरी का यह ‘भागीरथी’ आश्रम उन 20 और चेहरों पर मुस्कान ला सके जो आज भी एक सहारे की तलाश में हैं।

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