Thursday, February 26, 2026

विशेष रिपोर्ट: भीसमपुर का शिक्षामित्र बना ‘यमराज’, मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ पर CMO और BSA ने साधी चुप्पी

विशेष रिपोर्ट: भीसमपुर का शिक्षामित्र बना ‘यमराज’, मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ पर CMO और BSA ने साधी चुप्पी

 

ब्यूरो रिपोर्ट | परीक्षित उपाध्याय

​शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों में जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज का विश्वास डगमगाने लगता है। उत्तर प्रदेश के भीसमपुर क्षेत्र से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग से लेकर स्वास्थ्य महकमे तक की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप है कि भीसमपुर का एक शिक्षामित्र, कैलाश राम, क्षेत्र के मासूम बच्चों और ग्रामीणों के लिए ‘यमराज’ का पर्याय बन चुका है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिले के आला अधिकारी—मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA)—इस पूरे प्रकरण पर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं।

 

अखोरवा गांव में शिक्षा की आड़ में ‘अंधेरा’

​कैलाश राम की तैनाती भीसमपुर में है, लेकिन स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, वह अखोरवा गांव में भी सक्रिय रहता है और वहां के शिक्षण कार्यों व अन्य गतिविधियों में उसका सीधा दखल है। अखोरवा गांव के प्राथमिक विद्यालय की स्थिति और वहां के बच्चों के साथ कैलाश राम का व्यवहार लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि कैलाश राम न केवल अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ क्रूरता करता है, बल्कि उसकी कुछ संदिग्ध गतिविधियों ने उसे ‘यमराज’ का नाम दे दिया है।

 

क्या है ‘यमराज’ बनने की पूरी कहानी ?

​स्थानीय लोगों का कहना है कि कैलाश राम का रसूख इतना अधिक है कि वह स्कूल के समय में भी अपनी मनमानी करता है। रिपोर्टों के अनुसार, कैलाश राम पर अवैध रूप से चिकित्सा कार्यों में लिप्त होने या स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में अनधिकृत हस्तक्षेप करने के भी गंभीर आरोप हैं। ‘यमराज’ विशेषण का प्रयोग इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उसके कथित गलत परामर्श या हस्तक्षेप के कारण कई परिवारों को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ी है।

​शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, एक शिक्षामित्र का कार्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है। लेकिन कैलाश राम के मामले में, कलम पकड़ने वाले हाथ कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। स्थानिय लोगो का कहना है कि “वह खुद को कानून से ऊपर समझता है। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बजाय वह अन्य कार्यों में व्यस्त रहता है, और अगर कोई विरोध करे तो उसे सत्ता और रसूख की धमकी दी जाती है।”

 

CMO और BSA की रहस्यमयी चुप्पी: मिलीभगत या लापरवाही?

​किसी भी जिले में शिक्षा की जिम्मेदारी BSA और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी CMO की होती है। जब एक सरकारी कर्मचारी पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हों, तो इन अधिकारियों की सक्रियता अनिवार्य हो जाती है। हालांकि, इस मामले में तस्वीर बिल्कुल उलट है।

 

BSA की भूमिका: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं कि कैलाश राम स्कूल से नदारद रहता है और अखोरवा गांव में उसकी गतिविधियां संदिग्ध हैं। इसके बावजूद, अब तक कोई विभागीय जांच या निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई है। क्या BSA कार्यालय किसी दबाव में है?

 

CMO की भूमिका: स्वास्थ्य विभाग से जुड़े गंभीर आरोपों के बावजूद CMO कार्यालय ने इस पर संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। जब एक गैर-पेशेवर व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लोगों के जीवन से खेल रहा हो, तो CMO की चुप्पी विभाग की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करती है।

​ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश

​कैलाश राम की कारगुजारियों और अधिकारियों की उदासीनता ने क्षेत्र के लोगों में भारी रोष पैदा कर दिया है। अखोरवा और भीसमपुर के ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही इस ‘यमराज’ रूपी कर्मचारी पर नकेल नहीं कसी गई, तो वे जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।

 

उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

​कैलाश राम की संपत्तियों और उसकी शैक्षणिक योग्यता की निष्पक्ष जांच हो।

​अखोरवा गांव में उसके द्वारा किए गए कार्यों का ऑडिट कराया जाए।

​लापरवाह अधिकारियों (BSA और CMO) के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

 

भ्रष्टाचार और संरक्षण का खेल

​यह मामला केवल एक शिक्षामित्र की मनमानी का नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र की विफलता है जो भ्रष्टाचार के दीमक से खोखला हो चुका है। चर्चा है कि कैलाश राम को कुछ स्थानीय सफेदपोश नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण विभाग उसके खिलाफ हाथ डालने से डर रहा है। सरकारी वेतन पर पलने वाला एक कर्मचारी जब जनता के लिए ही संकट बन जाए, तो समझ लेना चाहिए कि व्यवस्था वेंटिलेटर पर है।

 

निष्कर्ष: कब जागेगा प्रशासन?

​भीसमपुर और अखोरवा की जनता आज दहशत और असुरक्षा के साये में है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे दो बुनियादी स्तंभों को एक व्यक्ति अपनी सनक और रसूख से ध्वस्त कर रहा है। CMO और BSA की चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं पर्दे के पीछे कुछ बड़ा खेल चल रहा है।

​अब देखना यह है कि क्या शासन प्रशासन इस रिपोर्ट के बाद कुंभकर्णी नींद से जागता है, या फिर ‘यमराज’ बना यह कैलाश राम इसी तरह मासूमों के भविष्य और जीवन से खेलता रहेगा।

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