Saturday, April 18, 2026

वाराणसी: शिवदशा में ‘मंत्री’ के रसूख और कोर्ट के आदेश के बीच ठना रार, निजी जमीन पर जबरन रास्ता बनाने का आरोप

वाराणसी: शिवदशा में ‘मंत्री’ के रसूख और कोर्ट के आदेश के बीच ठना रार, निजी जमीन पर जबरन रास्ता बनाने का आरोप
वाराणसी। जिले के शिवदाशा क्षेत्र में एक बार फिर जमीन विवाद को लेकर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर द्वारा प्रस्तावित एक सड़क को लेकर पिछले छह महीनों से चला आ रहा विवाद अब और गहरा गया है। ताजा मामले में, सृष्टि निवासी विजय कुमार राय की निजी भूमि पर जबरन रास्ता बनाने की कोशिश का आरोप लगा है।

क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, ठेकेदार शशांक श्रीवास्तव के कथित इशारे पर शिवदशा की महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को आगे कर विजय कुमार राय की निजी जमीन से रास्ता निकालने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने मौके पर जमकर हंगामा किया और निर्माण कार्य को अंजाम देने की कोशिश की।

वहीं, विपक्षी पक्ष विजय राय और अनिल राय का कहना है कि यह उनकी पैतृक आबादी की जमीन है, जिस पर वे कई वर्षों से निवास कर रहे हैं। इस विवाद को लेकर मामला पहले ही न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुका है।

न्यायालय ने लगाई है रोक
पीड़ित पक्ष के अनुसार, माननीय न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में ही आपत्ति को स्वीकार किया था और निर्माण कार्य पर रोक (Stay Order) लगा रखी है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि इस निजी आबादी की जमीन से कोई सार्वजनिक रास्ता नहीं गुजरता है। बावजूद इसके, अदालती आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए निर्माण की कोशिश की जा रही है।

मंत्री के नाम पर ‘रौब’ दिखाने का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम में शिवदशा के निवासी किशन राजभर की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि किशन राजभर खुद को कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर का करीबी बताता है और अधिकारियों व पुलिस थाने में मंत्री के नाम का खौफ दिखाकर जबरन रास्ता बनवाने के लिए दबाव बना रहा है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि:

न्यायालय के आदेश का सम्मान किया जाए।

निजी संपत्ति पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को रोका जाए।

सत्ता के रसूख का इस्तेमाल कर धमकाने वाले तत्वों पर कार्रवाई हो।

तनाव की स्थिति बरकरार
क्षेत्र में भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ग्रामीणों के एक गुट को सड़क चाहिए, जबकि जमीन के मालिक अपनी निजी संपत्ति को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराता है या फिर ‘सियासी रसूख’ के आगे कानून बौना साबित होगा।

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