Friday, August 29, 2025

भारत की राजनीति और लोकतंत्र की हत्या, काली शंकर उपाध्याय की कलम से

भारत की राजनीति और लोकतंत्र की हत्या

काली शंकर उपाध्याय की कलम से

भारत एक लोकतांत्रिक देश है और कहा जाता है की अभिव्यक्ति की आजादी ही लोकतंत्र है. अभी यह अभिव्यक्ति की आजादी है कहां यह भी बहुत सोचने योग्य  बात है, भारत में बहुत सारी राजनीतिक पार्टियां है कुछ क्षेत्रीय हैं तो कुछ राष्ट्रीय स्तर पर है फिलहाल में राष्ट्रीय स्तर पर दो पार्टियां हैं कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी भारतीय जनता पार्टी इस समय सत्ता में है और केंद्र में दूसरी बार इनकी सरकार बनी है भारतीय जनता पार्टी में बहुत बार ऐसा हुआ है कि देश के कुछ ऐसे वरिष्ठ नागरिक गण ने बहुत बार ऐसी आवाज उठाई कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में लोकतंत्र की हत्या हो रही है. अब लोकतंत्र की हत्या होती क्या है सही मायने में मैं आप लोगों के सामने पेश करता हूं लोकतंत्र का मतलब हर व्यक्ति को उसका अधिकार आजादी और उस को बोलने का अधिकार सामान रखा गया है, लेकिन क्या संविधान में सवर्णों के साथ हो रहे इस समय अत्याचार के बारे में लिखा गया है ब्राह्मण क्षत्रिय या अन्य सवर्णों के साथ जो इस समय आरक्षण का खेल चल रहा है क्या इसमें लोकतंत्र की हत्या नहीं हो रही है क्या इस आरक्षण से सवर्णों का अभिव्यक्ति की आजादी नहीं छिनी जा रही है, एक छोटा सा उदाहरण मैं बताता हूं कोई भी सरकारी नौकरी का फार्म अगर निकलता है, तीन कैटेगरी में उसको बांटा जाता है जनरल ओबीसी और एससी एसटी उदाहरण के तौर जनरल वाले के 1000 देना है ओबीसी वालों को 500 देना है और एससी एसटी वालों को 200 देना है अब बात यहीं पर आकर अटक जाती है क्या  सवर्णों के घर पैदा होने वाला बच्चा अमीर पैदा होता है, या पैदा होते ही वह अमीर हो जाता है, क्या जितने भी समान हैं वह बहुत अमीर हैं जो उनको आरक्षण कितनी मार्शल नहीं पड़ रही है यह लोकतंत्र की हत्या है कि नहीं क्या उसकी अभिव्यक्ति की आजादी नहीं छिनी गई जब अभिव्यक्ति की आजादी में सबको समान का अधिकार है तो फिर सवर्णों के साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों क्या उस समय लोकतंत्र की हत्या नहीं हुई,  अभिव्यक्ति की आजादी या कहले की लोकतंत्र की हत्या हमारे संविधान से ही शुरू होती है.

 

उत्तर प्रदेश में इस समय चुनाव का सरगर्मी बहुत तेजी से चल रहा है और राजनीतिक पार्टियां अपना हर हथकंडा अपना रही  हैं.

इसी दौरान आप लोगों को एक जानकारी मैं देना चाहता हूं की राजनीतिक पार्टियां किस तरह से लोकतंत्र की हत्या करते हैं और किस तरह से लोगों को बरगला कर फुसलाकर वोट बैंक बनाते हैं उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले कई सालों से जातिवाद बहुत तेजी से चला हैं, जिससे कि उत्तर प्रदेश का विकास ही नहीं हुआ हर पार्टी में जातिवाद की चरम सीमा पर जाकर लोगों को बरगलाती है और अपना वोट बैंक बनाते हैं क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं हुई बात इतने तक खत्म नहीं हो जाती है कितनी पार्टियां उत्तर प्रदेश में ऐसी भी हैं जिन्हें सिर्फ उनके जाति के नाम से जाना जाता है कि अगर किसी की जाति का नाम ले लिए तो लोग बोलेंगे कि यह तो उस पार्टी का आदमी होगा सिर्फ जाति का नाम ले लीजिए लोग कह देते हैं कि यह आदमी तो उस पार्टी को वोट देगा इतनी गंदी स्तर हो चुकी है और लोग लोकतंत्र की दुहाई देते हैं इसी के साथ मैं अपनी कलम को विराम देता हूं कहीं पर आकर तूती हुई हो या कहीं किसी को मेरी लेखनी से आहत हो तो मैं सब से क्षमा प्रार्थी रहूंगा.

भारत की राजनीति और लोकतंत्र की हत्या
काली शंकर उपाध्याय की कलम से
भारत एक लोकतांत्रिक देश है और कहा जाता है की अभिव्यक्ति की आजादी ही लोकतंत्र है. अभी यह अभिव्यक्ति की आजादी है कहां यह भी बहुत सोचने योग्य बात है, भारत में बहुत सारी राजनीतिक पार्टियां है कुछ क्षेत्रीय हैं तो कुछ राष्ट्रीय स्तर पर है फिलहाल में राष्ट्रीय स्तर पर दो पार्टियां हैं कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी भारतीय जनता पार्टी इस समय सत्ता में है और केंद्र में दूसरी बार इनकी सरकार बनी है भारतीय जनता पार्टी में बहुत बार ऐसा हुआ है कि देश के कुछ ऐसे वरिष्ठ नागरिक गण ने बहुत बार ऐसी आवाज उठाई कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में लोकतंत्र की हत्या हो रही है. अब लोकतंत्र की हत्या होती क्या है सही मायने में मैं आप लोगों के सामने पेश करता हूं लोकतंत्र का मतलब हर व्यक्ति को उसका अधिकार आजादी और उस को बोलने का अधिकार सामान रखा गया है, लेकिन क्या संविधान में सवर्णों के साथ हो रहे इस समय अत्याचार के बारे में लिखा गया है ब्राह्मण क्षत्रिय या अन्य सवर्णों के साथ जो इस समय आरक्षण का खेल चल रहा है क्या इसमें लोकतंत्र की हत्या नहीं हो रही है क्या इस आरक्षण से सवर्णों का अभिव्यक्ति की आजादी नहीं छिनी जा रही है, एक छोटा सा उदाहरण मैं बताता हूं कोई भी सरकारी नौकरी का फार्म अगर निकलता है, तीन कैटेगरी में उसको बांटा जाता है जनरल ओबीसी और एससी एसटी उदाहरण के तौर जनरल वाले के 1000 देना है ओबीसी वालों को 500 देना है और एससी एसटी वालों को 200 देना है अब बात यहीं पर आकर अटक जाती है क्या सवर्णों के घर पैदा होने वाला बच्चा अमीर पैदा होता है, या पैदा होते ही वह अमीर हो जाता है, क्या जितने भी समान हैं वह बहुत अमीर हैं जो उनको आरक्षण कितनी मार्शल नहीं पड़ रही है यह लोकतंत्र की हत्या है कि नहीं क्या उसकी अभिव्यक्ति की आजादी नहीं छिनी गई जब अभिव्यक्ति की आजादी में सबको समान का अधिकार है तो फिर सवर्णों के साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों क्या उस समय लोकतंत्र की हत्या नहीं हुई, अभिव्यक्ति की आजादी या कहले की लोकतंत्र की हत्या हमारे संविधान से ही शुरू होती है.

उत्तर प्रदेश में इस समय चुनाव का सरगर्मी बहुत तेजी से चल रहा है और राजनीतिक पार्टियां अपना हर हथकंडा अपना रही हैं.
इसी दौरान आप लोगों को एक जानकारी मैं देना चाहता हूं की राजनीतिक पार्टियां किस तरह से लोकतंत्र की हत्या करते हैं और किस तरह से लोगों को बरगला कर फुसलाकर वोट बैंक बनाते हैं उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले कई सालों से जातिवाद बहुत तेजी से चला हैं, जिससे कि उत्तर प्रदेश का विकास ही नहीं हुआ हर पार्टी में जातिवाद की चरम सीमा पर जाकर लोगों को बरगलाती है और अपना वोट बैंक बनाते हैं क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं हुई बात इतने तक खत्म नहीं हो जाती है कितनी पार्टियां उत्तर प्रदेश में ऐसी भी हैं जिन्हें सिर्फ उनके जाति के नाम से जाना जाता है कि अगर किसी की जाति का नाम ले लिए तो लोग बोलेंगे कि यह तो उस पार्टी का आदमी होगा सिर्फ जाति का नाम ले लीजिए लोग कह देते हैं कि यह आदमी तो उस पार्टी को वोट देगा इतनी गंदी स्तर हो चुकी है और लोग लोकतंत्र की दुहाई देते हैं इसी के साथ मैं अपनी कलम को विराम देता हूं कहीं पर आकर तूती हुई हो या कहीं किसी को मेरी लेखनी से आहत हो तो मैं सब से क्षमा प्रार्थी रहूंगा.

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