राष्ट्रीय स्वाभिमान की पुनर प्रतिष्ठा
—-पुरानी नींव पर नव निर्माण कर रचा इतिहास
विशेष संवाददाता द्वारा
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सोनभद्र । काशी पुराधिपति देवाधिदेव महादेव की पावनन
गरी त्रिशूल पर बसी काशी इस समय आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में एक बार फिर विकसित कर दी गई है । राष्ट्रीय स्वाभिमान
के पुनर्प्रतिष्ठा महायज्ञ का एक चरण और सम्पन्न हो गया है । पूर्ण भव्यता से निर्मित काशी विश्वनाथ मंदिर का दिव्य स्वरूप
‘विश्वनाथ कारीडोर’ को विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 13 दिसंबर सोमवार को लोकार्पित करेंगे ।
“इसी लिये तो माँ गंगा ने अपने बेटे को बुलाया था ” । सनातन संस्कृति में आस्था रखने वालों के लिए ‘यहीं तो है–
‘अच्छे दिन ‘ विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय सह मंत्री और प्रचार प्रमुख अम्बरीष सिंह की माने तो भौमवार को एक गौरवशाली अतीत की पुनर्प्रतिष्ठा के अवसर का काशी ही नहीं अपितु पूरा संसार साक्षी बनेगा । आक्रांता के चिन्ह को बौना बनाने वाले प्रधानमंत्री
का यह कार्य इतिहास के सुनहरे पृष्ठ पर सदैव के लिए अंकित हो जाएगा ।
गौरतलब हो कि काशी नगरी इस समय प्रदेश और देश की सरकारों की प्राथमिकताओं की पहली पायदान पर है ।
Up 18 news report by Chandra Mohan Shukla.