सोनभद्र जनपद की नारी शक्तियां।
सोनभद्र। जहां नारियों की पूजा होती है वही देवताओं का निवास होता है मनु स्मृति में वर्णित यह सूक्त वाक्य भारत सहित विदेशों में नारी जाति पर परिलक्षित हो रहा है।
हमारे देश में नारी शक्ति की पूजा का प्राविधान आदिम काल से रहा है।
वैदिक काल में नारियों को पुरुष की शक्ति के रूप में हमारे ऋषि मुनियों ने देखा और वैदिक साहित्य में इस तथ्य को वर्णित किया है।
अस्त्र शस्त्रों से युक्त शेर पर सवारी करने वाली देवियों की पूजा, आराधना, अनुष्ठान की परंपरा हमारे देश के कायम रही है।
मानव गुफाओं, कंदराओ, जंगलों में निवास करता था उस समय भी नारी शक्ति के रूप में आदिम समाज में प्रतिष्ठित थी, सोनभद्र जनपद के पंचमुखी सहित अन्य गुफाओं में आदिमानव द्वारा चित्राकित गुफाचित्रों में देवियों के चित्र शिकार करती, सजी संवरी, नाचती, गाती, बजाती, बालाएं इस तथ्य की साक्षी है कि आदिम काल मे नारिया पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सामाजिक, संस्कृति, आर्थिक, धार्मिक गतिविधियों में भाग लेती थी।
मां दुर्गा के स्वरूप (भारत माता) को केंद्र में रखकर स्वाधीनता आंदोलन की लड़ाई संपूर्ण देश में लड़ी गई अंततः हमने भारत माता की हथकड़ियों बेड़ियों को काटकर विदेशी दासता से मुक्ति पाई थी।
ऐतिहासिक, सामाजिक सांस्कृतिक, धार्मिक केंद्रों से भरपूर आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र का महत्व संपूर्ण विश्व में है। जनपद की भौगोलिक, नैसर्गिक, राजनीतिक विशेषताओं के साथ- साथ जनपद सोनभद्र की नारी शक्तियों का महत्वपूर्ण स्थान है।
पराधीनता से लेकर स्वाधीनता के 75 में वर्ष (आजादी का अमृत महोत्सव) तक इन नारी शक्तियों कार्यों की वजह से सोनभद्र जनपद का नाम पूरे विश्व में प्रसिद्ध हुआ।
विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक, इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार- पराधीनता काल में 25 दिसंबर सन 1937 को जब भारत के लोकप्रिय नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू का आगमन रॉबर्ट्सगंज में हुआ था तो घर की देहरी लाघ कर उन्हें मुख्य चौराहे पर माल्यार्पण करने वाली पार्वती देवी, स्वाधीनता आंदोलन मे अपनी त्याग, तपस्या, के बल पर अंग्रेजों की दांत खट्टे करने वाली दुद्धि नगर की महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजेश्वरी देवी का नाम सोनभद्र के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है इन्होंने जहां एक ओर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ आम जनता का नेतृत्व किया, वही यह जेल की सजा और जुर्माने की सजा को झेला था।
स्वाधीनता के पश्चात साहित्य के क्षेत्र में रॉबर्ट्सगंज नगर की समाजवादी चिंतक, राम मनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित हम लोग साप्ताहिक समाचार पत्र की संपादक, डॉ शकुंतला शुक्ला, वाराणसी से प्रकाशित आज हिंदी दैनिक की स्तंभकार एवं शिक्षिका, लेखिका कुसुमलता त्रिवेद, सोनघाटी पत्रिका पत्रिका की साहित्य संपादक आदिवासी लोक कला केंद्र की सचिव, साहित्यकार आदिवासी जीवन के रंग कृति की कृतिकार प्रतिभा देवी, पद्य विधा की कवित्री डॉक्टर रचना तिवारी, अनीता “सोनपरी” कौशल्या कुमारी चौहान, कुमारी जयश्री राय कुमारी तृप्ति केसरवानी आदि महिलाओं ने हिंदी साहित्य की गद्य और पद्य विधा में अपनी गहरी पैठ बनाई।
प्रशासनिक क्षेत्र में रॉबर्ट्सगंज नगर की होनहार बेटी कविता चौरसिया (आईएएस) कुमारी साक्षी गर्ग (आईआरएस) प्रशासनिक अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रही हैं।
राजनीति के क्षेत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर बसंती पनिका, अनीता राकेश अपनी राजनैतिक योग्यता का प्रदर्शन कर चुकी हैं और वर्तमान समय में राधिका पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर विराजमान है। दुद्धी विधान सभा क्षेत्र की प्रथम महिला विधायक रूबी प्रसाद भी अपने उत्कृष्ट कार्यकाल की वजह से राजनीति के बुलंदियों को छुआ।
जनपद की एकमात्र नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष निशा सिंह का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज है।
शिक्षा के क्षेत्र में रॉबर्ट्सगंज नगर में न्यू लिटिल फ्लावर स्कूल की स्थापना करने वाली उर्मिला दीक्षित विजयलक्ष्मी दीक्षित, स्वामी विवेकानंद बाल विद्यालय की प्रथम प्रधानाचार्य चंदर बहिन जी (मम्मी जी) मंजूलता मनिक, कुसुमलता त्रिवेद, मीरा तिवारी, तुलसीकृत रामचरितमानस, सुंदरकांड, रामायण का शिक्षा के रूप में प्रचार- प्रसार करने वाली चंद्रकला श्रीवास्तव एवं अशिक्षित गृहणियों, कन्याओं को शिक्षित करने के लिए लगभग 60 वर्ष पूर्व पर्दा प्रथा को तोड़कर घर की देहरी को लाघकर घर-घर जाकर ट्यूशन पढ़ाने वाली गुरुजी (मोहिनी दुबे) का नाम उल्लेखनीय है।
बालिकाओं की शिक्षा के लिए कटिबद्ध प्रधानाचार्य सुभाग सिंह, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्राचार्य डॉक्टर अंजली विक्रम सिंह, डॉ सुषमा सिंह का नाम उल्लेखनीय है।
चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ प्रभात जिंदल, डॉ अनुपमा सिंह, डॉ नम्रता सिंह, डॉ वीणा सिंह,डॉक्टर गीता कुमार, होम्योपैथ चिकित्सक के रूप में डॉक्टर कृति श्रीवास्तव, दंत चिकित्सक के रूप में डॉ मीनाक्षी सिंह, डॉ अनुराधा सिंह विधि के क्षेत्र अलका जैन,पूनम सिंह, बिंदू यादव मांडवी सिंह “उज्जैन निर्मला शर्मा,” चंद्रावती जयसवाल, शीला सिंह, सुनीता चतुर्वेदी, धर्म- अध्यात्म के क्षेत्र में कथावाचक सुनीता पांडे, रिचा शुक्ला, बाल व्यास आराधना चतुर्वेदी, लोक गायन के क्षेत्र में चमेली देवी, उषा सिंह, आशा सिंह, इंद्रावती देवी, विजयलक्ष्मी मालवीय, श्रुति त्रिपाठी, अभिनय के क्षेत्र में प्रतीची मालवीय, पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंजना श्रीवास्तव, चिंता पांडे, तारा शुक्ला, सावित्री मिश्रा, योग के क्षेत्र में अनीता गुप्ता, रॉबर्ट्सगंज नगर की बहू संगीता केसरी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है जो वर्तमान समय में फिनलैंड में हिंदी भाषा की शिक्षा की अलख जगाई हुई है।
आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली आदिवासी महिलाओं की बात करें तो जनपद सोनभद्र के वनांचल, ग्रामीणाचलों में निवास करने वाली निवासी महिला कलाकारों के बिना राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर पर आयोजित सांस्कृतिक उत्सव पूरा नहीं होता है।
सोनभद्र की नारी शक्तियां देश- विदेश में अपनी उत्कृष्ट योग्यता का डंका पीट रही है जो हमारे लिए गर्व का विषय है।
UP 18 NEWS से चन्द्रमोहन शुक्ला की रिपोर्ट