“रूस – उक्रेन युद्ध में तटस्थता सर्वोत्तम नीति”
चन्दौली ब्यूरो/ डीडीयू नगर,पूर्वांचल आर्थिक संघ (वाराणसी) और पी जी कालेज सकलडीहा, चंदौली द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित “युद्धकाल में वित्तीय प्रबंधन” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता भारतीय वित्त संसथान, ग्रेटर नोएडा के डीन प्रोफेसर अमन अग्रवाल ने वर्तमान युद्ध के भारत पर नगण्य प्रभाव का अनुमान व्यक्त किया है क्योंकि भारत और उक्रेन के बीच बहुत कम मूल्य का व्यापर होता है. हाल के दिनों में रूस के साथ भी रक्षा व्यापर पर निर्भरता कम हुई है. वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन देन के लिए स्विफ्ट व्यवस्था काम करती है. इसके काम न करने की स्थिति में भी अन्य परम्परागत तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. जिसमें द्विपक्षीय व्यापर, वस्तुओं के बदले वस्तुओं का व्यापर, प्रमुख हैं. भारत का रुपया भी करीब 30 से अधिक देशों द्वारा सुरक्षित कोष में रखा जाता है. नई परिस्थितियों में भारत के रुपे कार्ड को अन्य देश भी आपना सकते हैं. डिजिटल मुद्रा के होने से भी वित्तीय लेन देन में आसानी होगी.
संघ के सचिव डॉ विश्वनाथ कुमार ने कहा कि संकट की स्थिति में आयातित वस्तुओं के उपभोग को कम करने तथा स्वदेशी को बढ़ावा देने का अवसर है. वैकल्पिक स्वच्छ ईंधन को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए.
डॉ अरुण कुमार उपाध्याय ने वर्तमान युद्ध को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की विफलता बताई तथा कहा कि कोरोना फैलाने के लिए चीन को दण्डित न कर पाने के कारण भी इनकी साख कम हुई है.
संचालन डॉ चंद्र प्रकाश राय तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ पंकज सिंह ने किया.
चन्दौली से संजय शर्मा की रिपोर्ट