हाइड्रोजन ऊर्जा विकास की परिकल्पना को साकार करने के लिए बीएचयू और नेशनल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (एनएसपीपी) एक साथ मिलकर काम करेंगे। दोनों संस्थाओं के बीच गुरुवार को इस आशय का एमओयू साइन हुआ। नेशनल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, दिल्ली के जनरल मैनेजर डॉ. प्रशान्त आत्रे ने इस संबंध में बीएचयू के वैज्ञानिकों के साथ यहां चलाए जाने वाले पायलट प्रोजेक्ट के स्वरूप निर्धारण के संबंध में विचार विमर्श भी किया। हाइड्रो पावर के क्षेत्र में अनुसंधान एवं पायलट प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक मदद का प्रयोजन किया गया है।
बीएचयू के विज्ञान संस्थान के हाइड्रोजन ऊर्जा केन्द्र में भौतिक विभाग के वैज्ञानिकों से परामर्श के दौरान डॉ. आत्रे ने हाइड्रोजन ऊर्जा केन्द्र के समन्वयक प्रो. ओएन श्रीवास्तव, प्रो. आरएस तिवारी, प्रो. अबु साज, डॉ. टीपी. यादव, डॉ. स्टर्लिंग हडसन एवं क्रेन्द के दस अनुसंधानकर्ताओं के विचारों को गंभीरता पूर्वक सुना। बीएचयू के वैज्ञानिकों ने उन्हें हाइड्रोजन ऊर्जा पर आधारित अनुसंधान एवं केन्द्र द्वारा अब तक किए गए सफल प्रयोगों के बारे में जानकारी दी। हाइड्रोजन चलित मोटर साइकिल, आटो, नैनो कार, खाना बनाने वाला चूल्हा/स्टोव, जेनसेट एवं हाइड्रोजन चलित टरबाइन से बिजली उत्पादन पर आधारित पावर प्वाइंट पेजेंटेशन दिया गया। दूसरे सत्र में हाइड्रोजन ऊर्जा केन्द्र विज्ञान संस्थान के भौतिकी, रसायनिक एवं वनस्पति विभाग द्वारा किये गये अनुसंधानों पर चर्चा हुई। हाइड्रोजन को संग्रहित करने वाले अनुसंधान को चर्चा में विशेष महत्व मिला। हाइड्राइड बनाने के अनुसंधान को पायलट प्लांट के स्तर पर ले जाने की सहमति भी बनी। तय हुआ कि सोलर फोटोवोलटाइक एलक्ट्रोलिसीस के अलावा हाइड्रोजन बनाने कि फोटो बायो, फोटो इनेक्ट्रोकेमिकल, फोटो कैटेलिटिक विधियों पर भी अनुसंधान को फोकस किया जाए। केन्द्र में लगे सोलर फोटोवोलटाइक, इलेक्ट्रोलिसिस प्लान्ट की क्षमता दो नार्मल मीटर क्यूब से बढ़ाकर पांच नार्मल मीटर क्यूब तक करने पर भी सहमति बनी।