नुक्कड़ नाटक संदेश के मंचन के उपरांत नवसंवत्सर बनारसी हास्य
ठहाका में श्रोता हुए लोटपोट
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वाराणसी महानगर के अस्सी घाट पर नवसंवत्सर मिलन
अंतर्गत नाट्य रंग कर्मियों एवं प्रख्यात हास्य-व्यंग्य ठहाका
गुरुओं द्वारा बनारसी हास्य ठहाका का आयोजन अस्मिता नाट्य संस्थान के संस्थापक/ महासचिव विजय कुमार गुप्ता
के निर्देशन में,महाकवि डॉ.अजीत
श्रीवास्तव चपाचप बनारसी के अध्यक्षता एवं कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक के संचालन में
संपन्न हुआ।
नाट्य रंग कर्मियों में संजय शर्मा,शोमित सिंह, रविशंकर, प्रमोद अग्रहरि,नीलम सिंह सहित अनेकों नाट्य रंगकर्मियों का सम्मान डॉ.सुबाष चंद्र, राजश्री फिल्म प्रोडक्शन की निदेशिका
फिल्म ऐक्टर राजश्री वर्मा, वूमेन
स्प्रिट क्रिएशन सोसाइटी की अध्यक्ष सोनी जायसवाल ने संयुक्त रूप से किया।
प्रमुख रूप से कृषि श्रृषि श्रीप्रकाश सिंह रघुवंशी लौकी बाबा एवं सूर्य प्रकाश सिंह के
गरिमामयी उपस्थिति में नवसंवत्सर बनारसी हास्य ठहाका
की शुरुआत ठहाका गुरु कवि नरेंद्र नाथ दुबे अडिग एडवोकेट की रचना- सनातन हिन्दी नवसंवत्सर को मैं हर जन-जन की शान समझता हूं, इसलिए इसका करना उचित सम्मान समझता हूं- हा…हां…हां..,
डॉ.अजीत श्रीवास्तव चपाचप बनारसी ने- लाल टमाटर देहरादून,काट राजा दूननू जून,
इंद्रजीत तिवारी निर्भीक ने-
मंहगाई है तेज ,ना करिए दिल को छोटा, खर्च ना करिए नोट, ना करिए दिल को छोटा, सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध ने- नव नगद ना तेरह उधार चाहिए, चिंतित बनारसी ने-
नव संवत्सर को हम सब दिल से मनायें,राग द्वेष छोड़ इक दूजे को
गले लगायें, झरना मुखर्जी ने- सपनों में बिखरना नहीं, जुड़ना है जिंदगी, पुरूषार्थ से तकदीर बदलना है जिंदगी, डॉ. प्रियंका तिवारी ने- नव संवत्सर सीख देता है हमें, सदाचार और शाकाहार का, हिन्दी और हिंदुस्तान पर ही नहीं,सबके प्रति प्रेम-परस्पर और सार्थक संस्कार का, डॉ. सुभाषचन्द्र ने- फूलों सा इक दूजे के मन को हम सब खिल- खिलायें,खुले मन मिजाज से, आचार, विचार,संस्कार को भी
ध्यान में रखकर,हम- सब,नव संवत्सर मनायें,भजन गायक गोपालजी त्रिपाठी ने- नवसंवत्सर चैत्र नवरात्र जब आवेला, धर्म, सत्कर्म क ऐहसास करावेला,दीन,दुखियन से लेके,राजा, महाराज तक,सबके
धर्म-कर्म, पूजा-पाठ ,दान देवेके भाव जगावेला।
कवियों का सम्मान केन्द्रीय
ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. कमलाकांत उपाध्याय, सरोजिनी महापात्रा, डॉ.भारती मिश्रा, शशांक शेखर त्रिपाठी एडवोकेट ने संयुक्त रूप से किया।
धन्यवाद आभार साहित्यिक संस्था नादान परिंदे के अध्यक्ष डॉ.सुबाष चंद्र एवं रमेश चंद्र पांडेय ने किया।