महीनों से धुआंधार विद्युत कटौती से जन जीवन अस्त-व्यस्त
👉 24 घंटे में आधा दर्जन से अधिक बार बिजली रानी के आने जाने का रहता है सिलसिला
👉 लो वोल्टेज से पूरे जनपद का ग्रामीण इलाका रहता है प्रभावित, येन केन प्रकारेंण चलता है कार्य
👉 हर चुनाव में व्यवस्था सुधारने का किया जाता है वायदा, बाद ने नहीं होता अमल
रावर्ट्सगंज (सोनभद्र)
चुनाव से पहले सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। चुनाव परिणाम आने के बाद और भी सब कुछ बेहतर हो जाना चाहिए था। परंतु सब कुछ उल्टा हो जाना अपने आप में आश्चर्य है। पूरे जनपद में धुआंधार विद्युत कटौती हो रही है। जबकि इस समय गेहूं के फसल का कटाई मड़ाई का कार्य चल रहा है। वही गर्मी भी अपनी चरम सीमा पर है। विद्युत कटौती का आलम यह है कि लोहरा पावर हाउस से क्षेत्र के दर्जनों गांव में विद्युत आपूर्ति किया जाता है। जहां सुबह 8:00 बजे से पूर्व बिजली रानी चली जाती हैं, फिर शाम 6:00 बजे के आसपास आती हैं। इसमें सबसे अधिक गौरतलब बिषय यह है कि कनेक्शन जब भी किसी को दिया जाता है उसके साथ बकायदा समझौता होता है।
समझौते के तहत विभाग घरेलू कनेक्शन 220 बोल्टेज देने को बाध्य है। परंतु यदि इस विषय का जांच किया जाए स्पष्ट होगा कि पूरे जनपद में 30 फ़ीसदी लोगो को ही मानक के अनुरूप विद्युत आपूर्ति किया जाता है। शेष 70 फिसदी लोग येन-केन प्रकारेण अपना काम चलाते हैं। विभाग के आला अधिकारी इस विषय के तरफ कभी ध्यान नहीं देते। सबसे अधिक गौरतलब विषय यह है कि ग्रामीण इलाकों में आपूर्ति किए जाने वाले विद्युत की क्षमता 90v/100v/व150v से अधिक नहीं होता। और इतने कम वोल्टेज पर ठीक तरीके से लाइट पंखा व पानी पीने हेतु समरसेबल नहीं चलाया जा सकता। फिर भी अधिकारी उपभोक्ताओं से दुश्मन की भांति विद्युत बिल वसूली करते हैं। इस विषय पर उत्तर प्रदेश सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए समस्या का निदान कराना चाहिए। जबकि सोनभद्र को उर्जाचंल कहा जाता है। और यही के लोग सबसे अधिक पीड़ित भी हैं। ऐसा क्यों हो रहा है? इसके लिए क्या जिम्मेदारी तय नहीं होना चाहिए है?
Up18 news report by Anand Prakash Tiwari