स्वच्छता अभियान सुस्त क्यों?
स्वच्छता अभियान पर सरकार का हो रहा है हर महीने करोड़ों का खर्च, जिम्मेदार कौन ?
करमा (सोनभद्र)
देश को स्वच्छ रखने के लिए देश में स्वच्छता अभियान की शुरूआत किया गया था। स्वच्छ भारत अभियान 1999 से चल रहा था। और इसके पूर्व इसका नामांकन ग्रामीण स्वच्छता अभियान से शुरू किया गया था। परंतु प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस परियोजना में परिवर्तन करके इस योजना का नाम निर्मल भारत अभियान रख दिया था। स्वच्छ भारत अभियान को सितंबर 2014 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्वीकृति दी गई थी। स्वच्छ भारत अभियान का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2014 को किया गया था।
महात्मा गांधी हमारे देश के राष्ट्रपिता थे। उनका सपना था कि हमारा देश स्वच्छ रहे, स्वस्थ रहें। और स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता अभियान को सबसे पहले बढ़ावा देना होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए सफाई अभियान का उद्घाटन गांधी जयंती के अवसर पर किया गया था। साफ सफाई से संबंधित सबसे बड़ी मुहिम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान का शुभारंभ दिल्ली के राजघाट से किया था। नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले दिल्ली के बाल्मीकि बस्ती में सड़कों पर झाड़ू लगा कर किया था। ताकि देश के लोगों में स्वच्छता के महत्व पर जागरूकता फैलाया जा सके। इस अभियान का लक्ष्य था संपूर्ण देश से गंदगी को हटाना, लेकिन इसके लिए सिर्फ और सिर्फ सरकारें अकेले काम नहीं कर सकती इसको सभी को मिलकर इस अभियान में शामिल हो कर आगे बढ़ाने जरूरत है।
लेकिन यदि सोनभद्र जिले की करमा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्र क्षेत्रों पर नजर डालें तो पता चलेगा सफाई अभियान इस समय सुस्त पड़ चुका है। इस क्षेत्र में हमारी सरकार ने हर गांव में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति भी कर रखा है। परंतु यह सभी कर्मचारी लगभग अपनी जिम्मेदारी से हटकर राजनीति करने में समय व्यतीत करने में जुट गए हैं। जिससे हर गांवों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। बरसातों से पूर्व ही नालियां बज बजा रही हैं। राहगीरों को आने-जाने में कठिनाइयो का सामना करना पड़ रहा है। यह कहना आश्चर्य नहीं होगा कि इस क्षेत्र से सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का ध्यान हट चुका है। जो कदापि उचित नहीं है। जिम्मेदार लोग जिम्मेदारी का एहसास कब करेंगे?
Up18 news report by Anand Prakash Tiwari. / Chandra Mohan Shukla.