दशवीं सदी की वीर लोरिक और मंजरी की प्रेम कहानी,आज भी आकर्षण केंद्र बनी हुई है।
सोनभद्र(विनोद मिश्रा)
दशवीं शदी की यह प्रेम कहानी है वीर लोरिक और मंजरी की, जिनकी निशानी मारकुंडी घाटी में देखने को मिलती है। ऐसी मान्यता है कि लोरिक ने अपनी प्रेमिका मंजरी की इच्छा पूरी करने के लिए अपनी तलवार से इस विशाल चट्टान को एक ही बार मे चीरकर दो टुकड़े कर दिए थे।
वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग के मारकुंडी घाटी में जब भी किसी की नजर बड़े विशालकाय कटे खड़े चट्टान पर पड़ती है तो लोगो को वीर लोरिक और मंजरी की प्रेम कहानी ताजा हो जाती है। यह स्थान वीर लोरिक पत्थर के नाम से प्रसिद्ध है। गोवर्धन पूजा के दौरान, यहाँ कई जोड़े लोरिक और मंजरी की तरह अपने प्रेम की प्रार्थना करने आते हैं। लोरिक और मंजरी की यह प्रेम कहानी 10 वीं सदी की बताई जाती है। आदिवासी अंचल में लोकप्रिय यह कहानी न सिर्फ सच्चे प्रेम का संदेश दे रही है बल्कि अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ने के लिए लोगो को प्रेरित करती है। सोनभद्र जिले के अगोरी स्टेट की रहने वाली मंजरी को बलिया के गौरा गांव निवासी वीर लोरिक से प्रेम हो गया था। लोरिक को पता था कि बिना युद्ध के मंजरी को हासिल नहीं किया जा सकता था। लोरिक एक महान योद्धा था। वही जानकारों कहना हैं कि उसकी तलवार 85 किलो की थी। राजा मोलागत ने तमाम उपाय के बाद भी वीर लोरिक अपनी बारात और सेना सोन नदी को पार कर अगोरी किले तक जा पहुंची जहा पर भीषण युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान वीर लोरिक अकेला ही हजारों के बराबर था। वीर लोरिक ने अगोर के राजा मोलागत को हराकर मंजरी से प्रेम विवाह किया था।
मंजरी के कहने पर लोरिक ने अपनी तलवार से काट दिया पत्थर।
मंजरी की विदाई के बाद उसकी डोली वाराणसी शक्तिनगर मार्ग स्थित मारकुंडी घाटी पहुंची। जहा पर नवविवाहिता मंजरी लोरिक के अपार बल को एक बार और देखने के लिए चुनौती दी और कहा कि कि कुछ ऐसा करो जिससे यहां के लोग हमारी प्यार को याद रखें। लोरिक ने पूछा कि बोलो मंजरी क्या करूँ। वही मंजरी ने लोरिक को एक विशाल चट्टान दिखाते हुए कहा कि वो अपने तलवार से इस चट्टान को एक ही वार में दो भागो में बाट दे, लोरिक ने विशालकाय चट्टान को अपनी तलवार से एक ही बार में दो भागों में विभाजित कर दिया। और अपनी प्रेम -परीक्षा में पास हो गए। इस अद्भुत प्रेम का प्रतीक दो भागों में खंडित शिलाखंड आज भी मौजूद हैं। आज भी वह पत्थर का टुकडा अमर प्रेम की निशानी के तौर देखी जा सकती है।
लोगों के आस्था की प्रतीक है लोरिक शिला।
इस पत्थर से लोगों की बहुत सी धार्मिक आस्थाएं भी जुड़ीं हैं. यहां पर पूर्वांचल समेत एमपी, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, इलाको से सैकड़ों लोग घूमने व दर्शन करने जाते हैं. लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी होने के कारण यहां पर गोवर्धन पूजा के समय विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है. लोगों की ऐसी भी मान्यता है कि यहां आने पर प्रेमी युगल की मान्यताएं भी पूरी होती हैं।