इस समय भारत की स्थिति विकास दर में और सड़क बिजली से लेकर अन्य जगहों से पर भी काफी तेजी से चल रहा है. लेकिन लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों के ऊपर आए दिन हमले होते हैं केंद्र सरकार कब इसको संज्ञान में लेगी और कब इस पर नया कानून बनाएगी नेता हो या किसी भी प्रकार का व्यापारिक व्यक्ति हो घटना हो दुर्घटना हो लोग पत्रकार को याद करते हैं ,लेकिन पत्रकार की सुरक्षा के लिए कानून क्यों नहीं क्या सिर्फ कहने के लिए ही बना है की पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है इस समय की स्थिति देखते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ऊपर देशवासियों का भरोसा आंख मूंद करते है लेकिन जिस तरह से पत्रकारों के ऊपर भारतीय जनता पार्टी की सरकार होते हुए भी आए दिन हमले होते हैं, यह किसी से छुपा है मामला बीते दिनों का है, सोनभद्र में दो पत्रकारों के ऊपर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई जाती हैं और पत्रकार घायल हो जाते हैं उनको ट्रामा सेंटर वाराणसी में भर्ती कराया जाता है आखिरकार सरकार दबाव में है कि पत्रकारों पर हो रहे हमले को संज्ञान में क्यों नहीं लेती है इस पर नया कानून क्यों नहीं बनाती है क्या पत्रकार सिर्फ खबर प्रकाशित करें या तो समाज में पत्रकार पत्रकारिता ही छोड़ दें. या तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता को कहा गया है वह संविधान से ही मिट जाना चाहिए पत्रकार भी आम जनमानस की तरह हो, और उससे कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की उम्मीद ना करें मामला सोनभद्र का जो है वह आपके सामने प्रकाशित किया जा रहा है.
पत्रकार श्याम सुंदर पाण्डेय व लड्डु पाण्डेय स्थानीय पत्रकार खलियारी पर जिस तरह से अज्ञात बदमाशों ने इनके उपर गोलियां चलायी है, यह निंदनीय है , इस घटना की उत्तर प्रदेश पत्रकार परिषद के जिलाध्यक्ष चंद्र मोहन शुक्ल ने घोर निन्दा करते हुए जिला प्रशासन से मांग किया है कि दूसाहसी अपराधियों को यथाशीघ्र गिरफ्तारी करते हुए कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। ताकि इस तरह के दूसरी घटना की पुनरावृत्ति न हो। इस पर पत्रकार परिषद के संगठन मंत्री आनंद प्रकाश तिवारी ने योगी सरकार से मांग किया है घटना में लिप्त अपराधियों को चिन्हित कर उनके ऊपर कठोर से कठोर कार्यवाही की जाय!