Friday, August 29, 2025

शहर में फैली है मौत की दहशत समाजसेवी और नेताजी लोग बन बैठे है भौकाली भग्त

शहर में फैली है मौत की दहशत समाजसेवी और नेताजी लोग बन बैठे है भौकाली भग्त

वाराणसी : देवाधिदेव देव महादेव की नगरी काशी जहां मौत भी अपनी आसरा बिछाए हुए महादेव की इजाजत के लिए कोसों दूर खड़ी होती है जहां मरना भी अपने आप में जीवन धन्य हो जाता है देश-विदेश में रहने वाले लोग भी काशी में खुद को जीवन की अंतिम विदाई लेना चाहते हैं जिसकी व्यक्ति और समाज की परम इच्छा होती है, धर्म और अध्यात्म जहां सुबह और शाम की आगाज के साथ दिनचर्या को जोड़कर प्रारंभ करती है जहां लोग महादेव की धुन में अपने ही लय से जीवन यापन करते हैं आज वहां कोरोना के संक्रमण नें दहशत का एक ऐसा माहौल बना दिया है जिससे लोग भयभीत व आशंकित हैं कि कब किस पहर मौत मडरा कर अपनी आगोश में लेने के लिए पांव पसार ले कौन सी ऐसी युगत अपनाई जाए जिससे कि इससे बचाव हो सके ..

निरंकुश और ढोंगी नेताओं की चलन से महामारी में लोग बेचैन

हमारी भारतीय संस्कृति में एक दूसरे के साथ खड़ा होना मदद करना और इंसानियत के रिश्ते को जिंदादिली से निभाना ही भारतीयता की पहचान है बदलते समय के इस दौर ने सब कुछ बदल दिया है जहां ढोंगी आज अपने ढोंग बनावटीपन के कारण मानव का एक विशेष चरित्र के साथ बदला चेहरा नजर आ रहा है वही रिश्तो में जज्बात और भावुकता का कोई मोल नहीं इस महामारी ने अपनापन के सजीव एहसास को भी नंगा करने का कार्य किया है जहां लोग खुशियों में शामिल होकर प्रफुल्लित होने का कार्य करते थे वही आज ही भयंकर दुख के काल में अपनी स्वयं की जीवन रक्षा के लिए कोसों दूरी बनाए हुए हैं कसूर किसका है यह कोई नहीं जानता लेकिन भावनात्मक रिश्तो में चोट के कारण इंसानी जज्बात को आघात पहुंचा है सबने ज्यादातर इस समय की कल्पना नहीं की होगी जहां लोग मृत आत्मा की अंत्येष्टि में भी शामिल होना नहीं चाहते ,मौत की दहशत में इंसानी रिश्तो को शर्मसार किया है जहां देश प्रदेश में बड़े-बड़े चेहरे और नामी-गिरामी नेताओं द्वारा उलूलजुलूल भाषण के साथ गंदी मानसिकता का पोल खुल रहा है वही आमजन का विश्वास भी अपने चहेतों से टूट रहा है दूरियां बढ़ रही हैं समय आज प्रत्येक आदमी को विवश कर दिया है कि सकारात्मक सोच अच्छी सूझबूझ के साथ आप अपने परिवार व खुद की रक्षा में ही सफल हो सकता है किसी के उम्मीद और भरोसा पर तो जीवन डगमगा रही है पिछले डेढ़ वर्षो से सरकार व सरकारी नुमाइंदों ने आम जनता को अपनी मानसिकता अनुसार भरपूर सहयोग किया लेकिन हकीकत कोसों दूर है जहां लोग दर्द से कराह रहे हैं वही मानसिक उलझन अभी उनको अपनी गिरफ्त में ले रही हैं समय के इस ढोंगी आश्वासन देने वाले नेताओं पर से लोगों का भरोसा उठ गया चुन चुन कर लोगों की मदद करना और अपने खास कार्यकर्ताओं के साथ अनदेखी करना कहीं सरकार के लिए भारी न पड़े । आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में मुंह बाए खड़ा है और हालात बद से बदतर होता जा रहा है जहां सरकारी महकमे में तनाव हो रहा है वही पार्टी में भी जबरदस्त बगावत की बू आ रही है , आने वाले दिनों में पता चलेगा कि कौन कितना लोगों के दिल में राज कर पाया झूठ और ढकोसला के साथ इस महामारी ने गजब का पोल खोला है जो अपनापन के साथ बरसों से लगाव के रूप में जुड़ी हुई थी ।

जन्म और मृत्यु जीवन का अटल सत्य है जो महादेव की इच्छा से पूर्ण होती है लेकिन साजिशन रची गई मौत हत्या के लिए जिम्मेदार जाना जाता है और होने वाली मौत आसमयिक और रची रचाई इंसानी साजिश के तहत हो रही हैं जिसका दुख सजीव चित्रण में मानव को व्यथित कर रहा है और इतिहास के पन्नों में अभ्यंकर और विकराल के रूप में दर्ज होकर कोरोना काल से जाना जाएगा ।

हो सके तो जिंदादिली से रिश्ते को निभाईये और अपने से जुड़े लोगों की भरपूर मदद करें समय है बीत जाएगा लेकिन जो चला जाएगा वह फिर लौटकर नहीं आएगा

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