तुम
तुमको पाकर जैसे अमृत ही पा लिया है,
तुम्हे देखकर जैसे खुदा को देख लिया है!
तुम्हे जानकर जैसे सबकुछ जान लिया है,
तुम हो जीवन आधार,तुम हो मेरे सम्बल सार!
तुम्हारा प्यार है जैसे दरख्त हो एक मधुबन का’
तुम्हारा साथ है जैसे,फूल हो रजनीगंधा !
तुम मीत हो मेरे हृदय के,
प्रीत हो मेरे जीवन के!
“वरिष्ठ कवियित्री दिल्ली”
” पारुल राज”