एकादशी पर परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ में उमड़ा जनसैलाब
0-आश्रम में वही भक्ति की ज्ञान गंगा
0-स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के दिव्य दर्शन के लिए भक्त हुए निहाल
0-लाखों भक्तों ने जमकर विशाल भंडारे में खाया प्रसाद
सोनभद्र(विनोद मिश्र)
परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ में पावन पर्व एकादशी के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने सदगुरुदेव भगवान योगेश्वर स्वामी अड़गड़ानंद का दिव्य दर्शन, सत्संग किया और जमकर विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ में एकादशी के पावन पर्व पर पूज्य स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज भक्तों को एकादशी के आध्यात्मिक स्वरूप बताएं , तथा पूज्य सद्गुरुदेव भगवान ने भजन “सुन री मैंने निर्बल के बलराम”अर्थात प्रत्येक मनुष्य का वास्तविक बल भगवान के द्वारा ही प्राप्त होता है सांसारिक बल धन पद और शारीरिक बल को लोग मानते हैं, लेकिन सब नश्वर है, व्यर्थ है, जब तक भगवान का बल बरद हस्त न मिले, इसलिए मन सहित इंद्रियों को संयमित करने के लिए एक भगवान के नाम का जाप करना चाहिए, जब मन सहित दसों इंद्रियों मौन हो जाएं और सिर्फ एक परमात्मा रूपी भगवान के चिंतन में निरंतर लगी रहे,तभी कल्याण हो सकता है, और यथार्थ गीता ही हमारा धर्म शास्त्र है जिसे सबके पास होना चाहिए, तभी ईश्वरी मार्ग प्रशस्त होगा।
योगेश्वर महाप्रभु परम पूज्य सदगुरुदेव भगवान के सत्संग से पूर्व आश्रम के संत तुलसी महाराज, भावा नंद महाराज, वरिष्ठानंद महाराज, लाले महाराज, गुलाब महाराज, प्रमोद महाराज, आदि संतों ने एकादशी की महत्ता पर अपने विचार भक्त गणों को बताएं मंचासीन तानसेन महाराज,सोहममहाराज ,शिवानंद महाराज ,आशीष महाराज इत्यादि संत रहे, पूरे आश्रम की व्यवस्था की कमान संभाले हुए आश्रम के वरिष्ठ संत नारद महाराज जी समेत दर्जनों पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था तथा आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की और असुविधाओं का सामना ना करना पड़े पूरी मुस्तैदी के साथ देर शाम तक बैठे रहे, लाखों की भीड़ ऐसे नियंत्रित होती रही जैसे भगवान की महिमा खुद-ब-खुद रास्ता बता रही हो पूज्य सदगुरुदेव भगवान के दर्शन सत्संग के उपरांत भिन्न-भिन्न प्रदेशों और जनपदों से आए हुए लाखों श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में जमकर प्रसाद खाया।