बाल अधिकार कानून के नियम साबित हुआ बौना।
उड़ाई जा रही है धज्जियां
नीतू और निर्मला नाम की दोनों बच्चियां आज भी है प्राथमिक शिक्षा से वंचित।
सोनभद्र(विनोद मिश्र)
जी हां, यदि बाल अधिकार कानून के नियमों की बात करें तो उसमें संभवत सोनभद्र ही ऐसा जिला होगा जहां बाल अधिकार कानून के नियमों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही है और बना नियम बौना साबित होता दिखा।आज शिक्षा के नाम पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा संचालित तमाम एनजीओ भी इस अभियान को भरपूर मटिया मेट करने पर आमादा है कहने को तो जनपद में बाल अधिकार से जुड़े तमाम कानून और इसके तहत जुड़े हुए कर्मचारी ही खुद ही अभियान को ठेंगा दिखाने में पूरी मुस्तैदी से लगे हुए हैं ऐसा ही एक मामला शाहगंज और अमउड़ मार्ग पर देखने को मिला मामले का खुलासा तब हुआ जब एनजीओ द्वारा संचालित जिला समन्वयक स्वयं ही यह घर का सर्वे करने के बाद ठीक उसके बगल के घर की याद नीतू और निर्मला नाम की लड़कियां इनको नहीं दिखाई दी मीडिया से बातचीत के दौरान इन दोनों बच्चियों ने बताया कि इनकी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक की शिक्षा नहीं प्राप्त हो सकी है पूछने पर इनके पिता सियाराम ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते इन दोनों का दाखिला नहीं कराया जा सका है बड़ा सवाल यह उठता है बाल अधिकार से जुड़े हुए तमाम कानून और प्रतिवर्ष होने वाली बाल गणना पर भी सवालिया निशान लग गया है आखिर नीतू और निर्मला को बाल गणना के सर्वे में एनजीओ से जुड़े हुए तमाम सदस्य क्यों इस घर को छोड़ दिए,