Friday, August 29, 2025

तापमान के गिरावट के कारण वातावरण में आद्रता बढ़ जाने से फसलों की करें रक्षा-जिला कृषि रक्षा अधिकारी

तापमान के गिरावट के कारण वातावरण में आद्रता बढ़ जाने से फसलों की करें रक्षा-जिला कृषि रक्षा अधिकारी
सोनभद्र(विनोद मिश्र)
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया है कि प्रदेश में तापमान में तेजी से गिरावट के कारण वातावरण में आर्द्रता बढ़ गई है जिससे गेहॅू की फसल में पीली गेरूई, आलू की फसल में अगेती एवं पछेती झुलसा, चना, मसूर एवं मटर में सेमीलुपर, फली बेधक, पत्ती धब्बा रोग के साथ-साथ राई/सरसों में माहू/लीफमाइनर तथा तुलासिता एवं अल्टरनेरिया, पत्ती धब्बा के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गई है उक्त के क्रम में फसल सुझाव एवं संस्तुतियों का विवरण निम्नवत है-
गेहूॅः- पीली गेरूई रोग के प्रकोप का लक्ष्ण प्रायः पत्तियों पर पीले पाउडर की धारियों के रूप में दिखाई देते है इस रोग के लक्ष्ण मुख्यतः ऊपरी पत्तियों तथा अत्यधिक प्रकोप की दशा में तने पर भी इसके धब्बे दिखाई देते है। पीली धारीयाॅं पौधो में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में बाधक बनतें है। जिसके कारण उत्पादन प्रभावित होता है। प्रकोप की दशा में प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ई0सी0 की 500 मिली मात्रा को 600-700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
राई/सरसोः-माहू एवं लीफमाइनर (पत्ती सुरंगक) से बचाव हेतु जैव कीटनाशी एजाडीरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ई0सी0 2.5 लीटर अथवा रसायनिक कीटनाशी डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0 अथवा आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ई0सी0 1.0 लीटर मात्रा को प्रति हे0 की दर से लगभग 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। तुलासिता एवं अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा- इस रोग के नियंत्रण हेतु मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0 अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की दो किलो ग्राम मात्रा प्रति हे0 की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
चना/मटर/मसूरः-सेमी लूपर, 50-60 बर्ड पर्चर प्रति हे0 की दर से लगाना चाहिए जिपर चिड़ियाॅं बैठकर सूडियों को खा सके। इस कीट के जैविक नियंत्रण हेतु बैसिलस थ्यूरिजिनेसिस (बी0टी0) एक किलो ग्राम अथवा एजाडीरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ई0सी0 2.5 लीटर लगभग 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से छिड़काव करना चाहिए। रासायनिक नियंत्रण हेतु मैथियान 50 प्रतिशत दो लीटर की मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से छिड़काव करना चाहिए। फली भेदक कीटः- एन0पी0वी0(एच0) 250 एल0ई0 प्रति हे0 की दर से लगभग 250-300 लीटर पानी में घोलकर सायंकाल छिड़काव करें। बैसिलस थ्यूरिजियेनसिस (बी0टी0) एक किलो ग्राम को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से छिड़काव करना चाहिए। एस्कोकाइटा ब्लाइट (पत्ती धब्बा रोग)ः- चने की फसल में इस रोग के नियंत्रण हेतु मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0- 2.0 किलोग्राम अथवा कापरआॅक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 2.5 किलोग्राम मात्रा प्रति हे0 की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। आलूः- आलू की फसल में अगेती/पछेती झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तीयों पर भूरे एवं काले रंगके धब्बे बनते है तथा तिव्र प्रकोप होने पर सम्पूर्ण पौधा झुलस जाता है रोग के प्रकोप की स्थिति में निम्नलिखित रसायनों मे से किसी एक को प्रति हेक्यर की दर से लगभग 600-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू0पी0- 2.5 किलोग्राम । मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0- 2.0 किलोग्राम। जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0- 2.0 किलोग्राम।

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