अपने दुर्दशा पर आशु बहाने को मजबूर जिले का राजकीय महाविद्यालय।
सोनभद्र(विनोद मिश्र)
सोनभद्र जिला मुख्यालय पर एकमात्र राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना हुए 14 वर्ष बीत चुके हैं फिर भी यह अपनी भौतिक सुविधाओं एवं संसाधनों के अभाव में दुर्दशा का आशु बहा रहा है ।इस राजकीय महिला महाविद्यालय में सबसे पहले खेल का मैदान सहित तमाम भौतिक संसाधनों की कमी प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रही है,
मौजूदा हालात यह है कि अभी तक यह बिल्डिंग विभाग को हैंड ओवर न किए जाने से तमाम राजकीय महाविद्यालयों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। महाविद्यालय की कार्य वाहक प्राचार्य बंदना ने वार्ता के दौरान अपनी प्रमुख समस्याओं को साझा किया और कहा कि इस महाविद्यालय में 600 छात्राएं अध्ययनरत हैं इसके साथ ही 3 स्मार्ट कक्षाएं भी संचालित की जाती हैं वैसे देखा जाए तो जनप्रतिनिधियों के साथ ही साथ जिला प्रशासन का भी व्यवहार इस राजकीय महाविद्यालय के प्रति ढुलमुल नीति वाली ही कही जा सकती है तभी तो 14 वर्ष बीतने के बावजूद आखिरकार किन कारणों के चलते आज तक विभाग को यह बिल्डिंग हैंडओवर क्यों नहीं किया गया, बावजूद इसके इस महाविद्यालय में सिर्फ कला संकाय की ही कक्षाएं संचालित की जाती है जो भाग्य का दूसरा पहलू यह है कि अभी तक इसमें बीएससी की कक्षाओं का संचालन करने के लिए शासन स्तर से अभी तक क्यों नहीं ध्यान दिया गया भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मवीर तिवारी ने बताया कि शासन स्तर पर लिखा पढ़ी की जा चुकी है उन्होंने यह भी बताया कि लिखित रूप में शासन को यह रिपोर्ट भी भेजा जा चुका है कि इस राजकीय महिला महाविद्यालय में बीएससी और बीकॉम की कक्षाएं भी संचालित हो।
वार्ता के दौरान सदर विधायक भूपेश चौबे ने कहा कि यह मामला घोरावल विधानसभा से जुड़ा हुआ है लेकिन आपके द्वारा संज्ञान में यदि लाया गया है तो जल्द ही इसे अमल में लिया जाएगा।