Friday, August 29, 2025

बाल मजदूरी करने वाले बच्चे हो जाते हैं मानसिक रूप से अस्वस्थ-रीना सिंह

बाल मजदूरी करने वाले बच्चे हो जाते हैं मानसिक रूप से अस्वस्थ-रीना सिंह
_पढ़ने,खेलने व कूदने के उम्र में बच्चों से न कराएं मजदूरी_
*रवीश पाण्डेय*
जन संघ सेवक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आयरन लेडी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेत्री रीना सिंह ने विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जो उम्र बच्चों का पढ़ने,खेलने- कूदने का होता है उस उम्र में बच्चों से मजदूरी कराना देश की सबसे बड़ी विडंबना है।इसके लिए सरकारों के साथ साथ लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा तभी जाकर इस पर रोक लगाया जा सकता है।विश्व बालश्रम निषेध दिवस पूरे विश्व में बाल मजदूरी के विरोध में मनाया जाता है। भारत देश के बारे में कहा जाए तो यहां बाल मजदूरी बहुत बड़ी समस्या है। भारत में बाल मजदूरी की समस्या सदियों से चली आ रही है। कहने को भारत देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। फिर भी बच्चों से बाल मजदूरी कराई जाती है। जो दिन बच्चों के पढ़ने, खेलने और कूदने के होते हैं, उन्हें बाल मजदूर बनना पड़ता है। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कहने को सरकारें बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करती हैं, फिर भी होता सिर्फ ढाक के वही तीन पात है।
इतनी जागरूकता के बाद भी भारत देश में बाल मजदूरी का खात्मा दूर-दूर तक नहीं दिखता है। इसके बिपरीत बाल मजदूरी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है मौजूदा समय में गरीब बच्चे सबसे अधिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। जो गरीब बच्चियां होती हैं, उन्हें पढ़ने भेजने की जगह घर में ही बाल श्रम कराया जाता है। छोटे-छोटे गरीब बच्चे स्कूल छोड़कर बाल-श्रम हेतु मजबूर हैं। बाल मजदूरी बच्चों के मानसिक, शारीरिक, आत्मिक, बौद्धिक एवं सामाजिक हितों को प्रभावित करती है। जो बच्चे बाल मजदूरी करते हैं, वो मानसिक रूप से अस्वस्थ्य रहते हैं और बाल मजदूरी उनके शारीरिक और बौद्धिक विकास में बाधक होती है। बालश्रम की समस्या बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करती है जो कि सविधान के विरुद्ध है और मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघन है।

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