कांग्रेसी क्यों शक करते हैं कि मोदी सरकार उद्योगपतियों को गलत तरीके से फायदा करती है,
क्योंकि इन कांग्रेसियों ने जितना गलत तरीके से अपने पारिवारिक लोगों को फायदा पहुंचाया है, उसका एक बहुत बड़ा इतिहास है।
चाहे सोनिया गांधी के बचपन का तथाकथित दोस्त इटली का लुक्खा क्वात्रोची हो जो इटली में लुक्खा गिरी करता था, उसे सोनिया गांधी ने अपने ससुराल अपने साथ बुलाकर उसे खरबपति और इटली का जाना माना व्यापारी बना दिया।
आज खुद इटली में क्वात्रोची को लेकर तरह तरह के जोक्स बनाए जाते हैं कि बचपन की दोस्त हो तो ऐसी जो अपने मायके के मित्र के लिए अपने ससुराल को लुटा दे।
राजीव गांधी के साथ एक ललित सुरी नामक व्यक्ति पढ़ता था। ललित सुरी के पिता कश्मीरी गेट में ऑटो पार्ट्स का बिजनेस था। परिवार एकदम साधारण था। ललित सूरी के पिताजी पाकिस्तान के रावलपिंडी से शरणार्थी के तौर पर दिल्ली आकर बसे थे और वर्षों तक एक किंग्सवे कैंप के रिफ्यूजी के शिविर में रहते थे।
लेकिन ललित सुरी राजीव गांधी के अच्छे दोस्त बन गए और फिर मारुति की पहली 10 डीलरशिप जो दिल्ली गाजियाबाद कानपुर और अहमदाबाद तथा मुंबई में थी, वह ललित सुरी के परिवार वालों और ससुराल वालों को दे दी गई थी।
अहमदाबाद और मुंबई की मारुति की डीलरशिप ललित सुरी की सास राजकुमारी नंदा को दिया गया और उत्तर भारत की सभी मारुति की डीलरशिप ललित सुरी के भाई या फिर उनके छोटे भाई के ससुराल वालों को दे दिया गया।
ललित सूरी के रिश्तेदार ने मारुति में स्टीयरिंग सप्लाई करने का ठेका लिया और सोना स्टीयरिंग लिमिटेड नामक कंपनी बनाई। उसी कंपनी के मालिक के लड़के संजय कपूर थे जो करिश्मा कपूर के थोड़े समय के लिए पति बने थे।
ललित सूरी ने खुद एक एयर कंडीशनर कंपनी बनाई जो मारुति की कारों में एयर कंडीशन सप्लाई करती थी।
मारुति के पहले भारत में पद्मिनी कारों की पूरी डीलरशिप ललित सूरी के पूरे खानदान वालों को दी गई थी। पूरे भारत में ललित सूरी के भाई साले जीजा बहनोई मामा ही एकमात्र कार डीलर हुआ करते थे।
ललित सुरी जो कभी साइकिल से स्कूल जाता था, राजीव गांधी से दोस्ती के बाद मर्सिडीज बीएमडब्ल्यू प्रदो बेंटले और लेंबोर्गिनी जैसी कारों से चलने लगा। उसके सभी रिश्तेदार खरबो में खेलने लगे।
फिर राजीव गांधी ने भारत सरकार के मालिकी की 9 होटलों को ललित सुरी को दे दिया और मात्र 1 साल के अंदर ललित सूरी पूरे भारत में 2000 कमरों के फाइव स्टार होटल भारत होटल ग्रुप और ललित होटल का मालिक बन गया। और तो और कनॉट प्लेस में दो बड़ी बिल्डिंग और तिलक मार्ग पर सागर बिल्डिंग ललित सुरी को दे दिया गया।
1982 में जब दिल्ली में एशियाई खेल हुए थे तब उस खेल का सारा ठेका ललित सूरी की कंपनी ज्योत्सना होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। इस कंपनी में ललित सुरी की पत्नी ज्योत्सना सुरी और ललित सुरी की सास राजकुमारी नंदा डायरेक्टर थी।
ललित सुरी की कंपनी को कभी पाइपलाइन बनाने का अनुभव नहीं था, फिर भी उन्हें भारत की सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन यानी एचबीजे पाइपलाइन, जिसे हजीरा बीजापुर जगदीशपुर पाइपलाइन कहते हैं, उसे बनाने के लिए 1984 में 800 करोड़ का ठेका दे दिया गया। फिर ललित सूरी ने यह ठेका कमीशन लेकर एक जापान की कंपनी को दे दिया।
जिस वक्त पूरी दुनिया का कंप्यूटरीकरण हो रहा था उस वक्त भारत में कंप्यूटर और कंप्यूटर पार्ट्स इंपोर्ट करने का एकमात्र लाइसेंस ललित सूरी की कंपनी को राजीव गांधी ने दिया था। और आश्चर्य की बात यह कि ललित सूरी की कंपनी कंप्यूटर इमपोर्ट करती थी फिर उस कंप्यूटर और कंप्यूटर के पार्ट को भारत सरकार की कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड को देती थी।
भारत की सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन के लिए स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया लिमिटेड को हटाकर ललित सूरी की कंपनी को पाइपलाइन सप्लाई करने का ठेका दिया गया। और आश्चर्य इस बात का ललित सूरी की कंपनी स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया से पाइपलाइन खरीद कर उसे भारत सरकार को दे रही थी।
ललित सुरी और राजीव गांधी के रिश्तो और ललित सूरी के भ्रष्टाचार की पूरी कहानी जब स्टेटमेंट्स नामक पत्रिका ने तथ्यों के साथ 1986 में छापा, राजीव गांधी ने मजबूरी में तबके तीन मंत्रियों का इस्तीफा लिया लेकिन खुद इस्तीफा नहीं दिया।
UP 18 NEWS से Paras nath की रिपोर्ट …