छोहन छाती फाटइ , सी क हरे हाँथ न जाय…’ !
सोनभद्र । ग्रामीण क्षेत्रों में यह
कहावत उस समय की है जब घर
के धरन- बडेर में ‘ सी क ह र ‘ बंधा रहता था । इस पर मेटा ( मिट्टी का बर्तन ) में घी रखा रहता था । लोग घर की बड़ी
बूढ़ी मालकिन की कंजूसी के
लिए कहावत कहते थे कि ‘
सी क हर ‘ तक हाँथ न जाय अउर छोहन छाती फा ट इ ‘ ।
छोह का अर्थ है ‘ प्रेम ‘ ।
यह कहावत कहते हुए होमियो पैथ के चिकित्सक डॉक्टर
अमरनाथ पाण्डेय गुरुवार को प्रदेश सरकार का वित्तविहीन
शिक्षकों को चार साल से मानदेय
न दिए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया
व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में 72 प्रतिशत का योगदान देने वाले
स्व वित्तपोषित शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के योगदान को स्वीकार कर उनके
पक्ष लेने की तो बात करती रहती
है लेकिन अखिलेश सरकार द्वारा
दिए जा रहे मानदेय को रोक कर
कौन सा भला कर रही है ।
डॉक्टर पाण्डेय ने कहा लगभग एक साल से ऊपर हो गए
स्व वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक कर्मचारियों में से अधिकांश को प्रबंधक वेतन देना
बंद कर दिए है या आधा अधूरा ही दे रहे है । उन्होंने कहा कि
कोरोना के कारण विद्यालय बंद
चल रहे है । पढ़ाई बंद है । ऐसे में
अभिभावक भी क्या करें । किस
बात के लिर फीस दें ।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग
की है कि चार साल से बकाया मानदेय का भुगतान शिक्षकों के
खातों में करे तथा कोरोना काल
के वेतन के लिए पैकेज प्रदान
करें । उसका भी भुगतान शिक्षकों
के खातों में ऑनलाइन ही होना
चाहिए ।