वाराणसी में क्रिकेट पर रोज करोडों-अरबो का सट्टा कारोबार
हाईटेक सट्टेबाजों से निपटना, पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
सूत्रों के अनुसार कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का संरक्षण भी प्राप्त है सट्टेबाजों को
हत्या, अपहरण, लूट व चोरी की वारदातों को रोकने की चुनौती में जुटी वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस के सामने अब क्रिक्रेट पर लग रहे सट्टे को रोकना बड़ी चुनौती है।
आईपीएल में बनारस में सट्टेबाजी जमकर चालू है
चाहे दुनिया मे कही भी मैच हो रहा हो बनारस में सट्टेबाजी का खेल जमकर चालू रहता है और आईपीएल के दौरान अपने शवाब पर रहता है
वाराणसी के सट्टेबाज क्रिक्रेट के महाकुंभ में अच्छे से गोता लगा रहे है।कस्टमर को सट्टेबाजों ने मोबाइल नम्बर के साथ कोडवर्ड भी एलाट कर कर रखा है, और खाया, लगाया, सेशन, लंबी आदि कूट भाषा मे हो रही बातचीत से रोजाना लाखो करोड़ो का सट्टा मैच की हार जीत पर लगना है।
*सट्टेबाजी में हो रहा है तकनीक का प्रयोग*
बदलते समय के साथ आधुनिक होते सट्टेबाजों ने मोबाइल एप टेक्नोलॉजी का उपयोग भी शुरू कर दिया है और गूगल प्ले स्टोर पर कई एप उपलब्ध है जो क्रिकेट के स्कोर के साथ ही सट्टेबाजों के तथाकथित “डब्बे” की लाइन का सीधा प्रसारण करते है और बॉल दर बॉल बदलता सट्टे का रेट उसपे आता रहता है
सोशल मीडिया एप व्हाट्सएप का भी सट्टेबाज प्रयोग कर रहे है, ऐसे ग्राहक जिनकी लिमिट प्रत्येक दिन 50 हजार रुपए या उससे अधिक है। उनके लिए वॉट्सएप ग्रुप तैयार किए गए हैं। मैच की पल-पल की अपडेट उन्हें इस ग्रुप पर उपलब्ध कराई जाती है, पर बुकिंग कॉल के जरिए ही कि जा रही है
ऐसे होता है खेल
टी-20 मैच में टॉस के बाद पल-पल खेल की स्थिति बदलती है। टॉस से पहले दोनों टीमों के हार-जीत का भाव आता है। पर टॉस जो टीम जीतती है और जिस मैदान पर खेल हो रहा है उसका इतिहास व टीमों की स्थिति देखते ही तत्काल नए भाव आना शुरू हो जाते हैं। मैच की पहली गेंद से सेशन में गेम शुरू हो जाता है। पहली इनिंग में दो सेशन 1 से 10 ओवर और दूसरा 10 से 20 ओवर का होता है। जो प्रत्येक ओवर में बदलता है। जबकि सेकंड सेशन में एक से 06 ओवर का ही सेशन रहता है। अगले में जीत हार ही रहती है।
पिछले कुछ वर्ष में क्रिक्रेट पर सट्टा का कारोबार गलियों व मोहल्ले से पॉश कॉलोनियों में पहुंच गया है। यहां कमरा या फ्लैट किराए से लेकर सटोरिए खुद को महफूस समझते हैं।
कुछ व्यापारियों ने तो अपने मुख्य धंधे को छोड़ सट्टेबाजी को ही प्रमुख धंधा बना लिया है और लगातार सट्टेबाजी में लिप्त है और सूत्र बताते है कि उन्होंने बाकायदा भ्रष्ट पुलिसकर्मियों से *सेटिंग* कर रखी है और बाकायदा सट्टे की कमाई से उनका फिक्स हिस्सा भी मिलता रहता है
9 वर्ष पहले चेतगंज क्षेत्र से एक बड़ा सट्टेबाज पकड़ा गया था जिसके पास से बोरो में भर लाखों की नकदी भी मिली थी,इसके अलावा बुलानाला क्षेत्र से भी सट्टेबाजो का गिरोह पकड़ाया था।जो लैपटॉप व मोबाइल के जरिए सट्टा खिला रहा था।
यूपी एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने भी 4 वर्ष पूर्व सुंदरपुर इलाके से 3 लोगो को लाखों की नगदी के साथ आईपीएल पर सट्टा लगाते पकड़ा था।
कुल मिला के कहा जा सकता है कि 20-20 क्रिकेट का खुमार आजकल छाया हुआ है और इसके साथ ही रोजाना लाखो करोड़ो के सट्टा कारोबार हो रहा है। जानकारों का कहना है कि बिना भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के लम्बे स्तर का सट्टा खिलावाना ही मुमकिन नही है और उच्चाधिकारियों को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है
अब देखने वाली बात ये होगी की तकनीक के साथ कदमताल मिला कर अपनी व्यूह रचना करने वाले आधुनिक युग के सट्टेबाजों के जाल को पुलिस कैसे तोड़ती है।
✍️ UP 18 NEWS से आशीष मोदनवाल की रिपोर्ट





