कोंच इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के डिजिटल पटल पर हुई अंतरराष्ट्रीय परिचर्चा
‘निशंक’ जी का राष्ट़् अनुराग उनके लेखन का तत्व है: डॉक्टर रचना तिवारी
‘निशंक’ जी का साहित्य संवेदना और भाव भूमि पर रचा गया: डॉ सुधांशु शुक्ला
सोनभद्र। भारत सरकार के केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं कई दर्जन पुस्तकों के रचनाकार डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के लंबे साहित्यिक यात्रा पर बीते सोमवार को कोंच यज्ञ इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल के डिजिटल पटल पर हुई अंतरराष्ट्रीय परिचर्चा में जहां पोलैंड में हिंदी साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान डॉ सुधांशु शुक्ला ने प्रतिभाग किया वही हिंदुस्तान की जानी मानी अंतर्राष्ट्रीय गीतकार डॉ रचना तिवारी ने पटल पर निशंक जी की रचनाओं का अपने स्वर में वाचन कर सुर्खियां बटोरी। उन्होंने निशंक जी के गीत की उपजाऊ धरती का भी जिक्र करते हुए कहा कि ‘निशंक’ जी का साहित्य झंझावात और उबड़ खाबड़ रास्तों की उत्पत्ति है। आगे कहा उनकी रचनाओं में पहाड़ी खुशबू है जो कभी भी किसी रसायन से विनष्ट नहीं हो सकती। उनकी प्रतीक्षा खंड काव्य का जिक्र करते हुए रचना तिवारी ने कहा कि इसमें एक विधवा मां की आंखों का सपना है जो अपने बच्चे को राष्ट्र रक्षा हेतु सेना में भेजना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि निशंक जी राजनीति के चरम पर पहुंच कर भी अपने साहित्यिक जीवन में व्यवस्थाओं पर अपनी कलम चला रहे हैं जो उनके राष्ट्र अनुराग को दर्शाता हैं। वही चेयर वर्सा विश्वविद्यालय पोलैंड के हिंदी विद्वान डॉ सुधांशु शुक्ला ने ‘निशंक’ जी की साहित्यिक गतिविधि पर प्रकाश डालते हुए कहा निशंक जी के साहित्य की नायिकाएं ग्रामीण जीवन की संघर्षरत स्त्री हैं ना की सुविधा संपन्न स्त्री। डॉक्टर शुक्ला ने निशंक जी के विपदा जीवित है कहानी का वाचन भी किया और प्रतीक्षा खंड काव्य पर विस्तार से चर्चा की। परिचर्चा को डिजिटल पटल पर सैकड़ों लोगों ने देखा और अपनी सुखद प्रतिक्रियाएं व्यक्त की।आभार ज्ञापन पारस मणि अग्रवाल ने किया।
TTM news से चंद्रमोहन शुक्ला की रिपोर्ट





