Friday, August 29, 2025

प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले किसान जयप्रकाश के बेटे सुबास ने खेतो में लहलहा रहे अरहर जेपी नाइन व अन्य प्रजापतियों के बारे में किसानों को किया जागरूक*

*प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले किसान जयप्रकाश के बेटे सुबास ने खेतो में लहलहा रहे अरहर जेपी नाइन व अन्य प्रजापतियों के बारे में किसानों को किया जागरूक*

*रिपोर्ट शुभम् शर्मा*

 

*वाराणसी/-प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के राजातालाब क्षेत्र के तड़िया गाँव निवासी किसान जयप्रकाश सिंह जो कृषि क्षेत्र में अच्छा कार्य पैदावार प्रशिक्षण के कारण प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार से बीते वर्ष 2002 में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम व वर्ष 2009 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के हाथों सम्मानित हुए थे उनके बेटे सुभाष सिंह भी इन दिनों कृषि क्षेत्र में नए नए प्रजापतियों की उतपत्ति करने में लगे हुए है।अरहर की अधिक उपज देने वाली किस्म जेपी 9 कृषक सुबाष सिह ने बताया की जेपी अरहर किसान आर्गेनिक खेती कर सकते है फसल का समय 240 दिन कोई किडे फसल पर नही लगते दाल खाने मे स्वादिष्ट मिठा लगता है किसान भाई अरहर लगा के किसान अधिक उपज ले सकते है।किसानों को जागरूक करते हुए उन्होंने यह भी बताया कि गेहूं जेपी 151 जो एक एकड़ में 28 से 31 कुंतल व धान जेपी 153 एक एकड़ में 26 कुंतल प्रति एकड़ की पैदावार किसान कर सकते है यही नही मेरे द्वारा देशी सब्जियों का सरंक्षण भी किया जाता है।किसान सुभाष सिंह ने बताया कि जैविक खेती कृषि की वह विधि है जो संश्लेषित उर्वरकों एवं संश्लेषित कीटनाशकों के अप्रयोग या न्यूनतम प्रयोग पर आधारित है तथा जो भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिये फसल चक्र,हरी खाद,कम्पोस्ट आदि का प्रयोग करती है।सन् 1990 के बाद से विश्व में जैविक उत्पादों का बाज़ार काफ़ी बढ़ा है।हम सभी जानते है कि भारत एक विशाल देश है और यहाँ की लगभग 60 से 70 प्रतिशत जनसँख्या अपनी आजीविका निर्वहन के लिए कृषि कार्यों पर निर्भर है।हालाँकि आज से कुछ दशक पहले की जानें वाली खेती और वर्तमान में खेती करनें की प्रक्रिया में एक बहुत बड़ा अंतर है।स्वतंत्रता से पूर्व भारत में की जानने वाली खेती में किसी प्रकार के रासायनिक पदार्थो का उपयोग नहीं किया जाता था,परन्तु जनसँख्या विस्फोट के कारण अन्न की मांग बढ़नें लगी और धीरे-धीरे लोगो नें कृषि उत्पादन बढ़ानें के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना प्रारंभ कर दिया।जिसके कारण आज लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों का शिकार हो रहे है,जबकि 1960 से पूर्व देश परंपरागत और जैविक अर्थात ऑर्गेनिक खेती खेती की जाती थी।ऑर्गेनिक खेती क्या होती है,ऑर्गेनिक या जैविक खेती कैसे करे।इसके बारें में आज हम यहाँ विस्तार से चर्चा करेंगे।ऑर्गेनिक खेती फसल उत्पादन की एक प्राचीन पद्धति है।आपको बता दें कि ऑर्गेनिक खेती को जैविक खेती भी कहते है।जैविक कृषि में फसलों के उत्पादन में गोबर की खाद,कम्पोस्ट,जीवाणु खाद,फ़सलोन के अवशेष और प्रकृति में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थों के माध्यम से पौधों को पोषक तत्व दिए जाते हैं।सबसे खास बात यह है,कि इस प्रकार की खेती में प्रकृति में पाए जानें वाले तत्वों को कीटनाशक के रूप में प्रयोग किया जाता है।जैविक खेती पर्यावरण की शुद्धता बनाये रखनें के साथ ही भूमी के प्राकृतिक स्वरूप को बनाये रखती है।ऑर्गेनिक खेती का अभिप्राय एक ऐसी कृषि प्रणाली से है,जिसमें फसलों के उत्पादन में रासायनिक खादों एवं कीटनाशक दवाओं के स्थान पर जैविक या प्राकृतिक खादों का प्रयोग किया जाता है।वर्तमान समय में ऑर्गेनिक खेती से प्राप्त होनें वाली उपज की मांग बहुत अधिक है।*

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