वाराणसी। ख्वाब देखना बड़ी बात नहीं है उसे पूरा करना बड़ी बात है, और ये तब अहम हो जाता हैं जब आप विपरित परिस्थतियों में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं, वो भी अपनी काबिलियत के बलबूते। जौनपुर के कठ्वतिया सामान्य परिवार की ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने सपने भी देखे और उसे पूरा भी किया। दरअसल प्रतिमा के यहां खेती-वाड़ी का काम दादा परदादा के समय से होता चला आ रहा हैं, प्रतिमा अपनी खुद की पहचान के साथ आगे बढ़ने का शौक रखती थी। उसने अपने शौक को हुनर बनाकर अपने परिवार की आजीविका में हाथ बटाने का ख्वाब देखा। अपना रोजगार स्थापित करने का ख्वाब देखा। उसके ख्वाब की ताबीर भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक, (सिडबी) के सहयोग से बसनी में युवा ग्राम्य विकास समिति द्वारा संचालित साईं इंस्टिट्यूट ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट, बसनी द्वारा चलाये जा रहे जागरूकता अभियान से हुई। वहां जाकर उसे पता चला की यहाँ काशी विश्वनाथ मंदिर पर अर्पित फूलों से विभिन्न प्रकार के हर्बल उत्पादों की ट्रेनिंग महिलाओं को नि:शुल्क दी जा रही है। ये सब जानकारी जब प्रतिमा को पता चली तो मानो उनको अपनी मंजिल मिल गयी। उसने संस्था में चल रहे प्रशिक्षण में दाखिला ले लिया। कोर्स की खूबी जाने पर उनके परिजनो ने भी अनुमति न नुकूर नहीं की। इसकी एक और वजह थी कि यहां सिर्फ लड़कियों को ही प्रशिक्षण दिया जाता था। प्रतिमा ने कोर्स पूरा किया और अपने सपनो को उड़ान दी। आज उससे हुनर सीखने भी गाँव की काफी लड़कियां उसके घर पहुंच रही हैं। प्रतिमा की तरह ही यहाँ से निधि, रेनू पटेल, मोनिका गुप्ता, डिम्पल पटेल, प्रीतम, सरिता पटेल, नीलम पटेल, दीप्ति, मीनू जैसी दर्जनों तमाम युवतियां और महिलाएं बाबा विश्वनाथ मंदिर पर अर्पित फूलों से अपने व्यवसाय को नयी दिशा तो दे ही रही हैं, साथ ही वो अपने लिये एक सुचारू और पारदर्शी बाजार की अपेक्षा करती है, जहां पे वो अपने द्वारा बनाये गये उत्पादों को प्रदर्शित कर सकें। उन्हें वहां उनके रोजगार वृद्धि का मौका मिल सकें। संस्था के सचिव अजय सिंह ने बताया कि यहाँ से प्रशिक्षण लेकर के अपने हुनर से आज तमाम युवतियां और महिलाएं अपनी आजीविका सुचारू रूप से चला रही हैं। इसकी वजह है कि उन्हें सही मार्गदर्शन न सिर्फ उत्पादों को बेहतरीन बनाने में बल्कि सिडबी द्वारा स्वावलंबन मेले के माध्यम से उनके उत्पादों के विक्री में मदद कर रहा है बल्कि माय स्टोर, ओएनडीसी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म भी उपलब्ध करवा रही है। इस प्रकार के प्रशिक्षण और दूसरे क्षेत्रो में चलाये जाने की मांग स्थानीय लोग और महिलाएं कर रही है