जैन धर्म की मूर्तियाँ उद्भव और विकास” पुरातात्त्विक शोध पर आधारित।
पहली बार छायाचित्र प्रदर्शनी दिनांक 31 मई से 6 जून 2024 तक इंडिया हैबीटेट सेण्टर में दिल्ली में
प्रातः स्मरणीय दिगम्बराचार्य युग प्रणेता सिद्धांत चक्रवर्ती श्वेतपिच्छाचार्य परम पूज्य 108 श्री विद्यानन्द जी महा मुनिराज के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में,परम प्रभावक शिष्य प्रथम पट्टाचार्य श्री 108 श्रुत सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं सान्निध्य में दिल्ली में प्रथम बार एक छायाचित्र प्रदर्शनी दिनांक 31 मई से 6 जून 2024 तक इंडिया हैबीटेट सेण्टर में होने जा रही है जिसमें “ जैन धर्म की मूर्तियाँ उद्भव और विकास” पुरातात्त्विक शोध पर आधारित। परिवार एवं मित्रों सहित इस प्रदर्शनी में उपस्थित हों एवं आचार्य श्री का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
यह प्रदर्शनी भारतीय उपमहाद्वीप के लगभग सभी अंचलों से प्राप्त एवम् अनेक देशों ,भारत पाकिस्तान बांग्लादेश आदि संग्रहालयों में प्रदर्शित दुर्लभ जैन मूर्तियों के अलावा व्यक्तिगत संग्रहों की प्रतिमाओं के चित्रों। का संकलन है।
इस छाया चित्र प्रर्दशनी से यह प्रमाणित होता है कि जैन धर्म की प्रतिमाएं प्राचितम हैं।
जैन धर्म से संबंधित तथ्यों का उल्लेख reg वेद से ही मिलता है।इसमें त्रिथकर ऋषभ को वृषभ, केशिन, शिश्न देव, एवम् नग्न हू कहा जाता है ठीक इसी प्रकार यजुर्वेद अथर्व वेद, अग्नि पुराण विष्णु पुराण रामायण महाभारत इत्यादि जैसे प्राचीन साहित्य में त्रिथकर ऋषभ अजीत एवम नेमि का उल्लेख मिलता है।
उक्त साहित्यक तथ्यों का सत्यापन पुरातत्व विज्ञान से होता है।
प्राचीनतम सिंधु घाटी की सभ्यता के पूरा स्थलों से कई ऐसी मानव मूर्तियां मिली है जो ऐतिहासिक तीर्थकर प्रतिमाओं के सदृश है जिन्हे इनका प्रारूप कहा जा सकता है।
प्रदर्शनी दिगंबरचार्य युग प्रणेता स्वेत पीछाचर्या आचार्य विद्या नंद मुनि के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है