उत्तर प्रदेश: कहते है दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से हो के जाता है , उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय भारतीय जनता पार्टी की कम सीट आने के कारण पूरे पार्टी में कौतूहल मचा है, जहा 80 सीट में से 70 सीट की उम्मीद लगाए बैठी भारतीय जनता पार्टी के खाते में सिर्फ 33 सीट ही मिले वहीं दूसरी विपक्ष पार्टियों में खुशी का माहौल बना हुआ है. जहा समाजवादी पार्टी को 37 और आईंएनसी को 6 और आरएलडी को 2 अस्पक्र 1 और अदल को 1 सीट मिली जहा बीजेपी 70 की उम्मीद लगाई थी उन्हे भारी नुकसान का सामना करना पड़ा.
क्या है कम सीट पाने का कारण :
1 — उत्तर प्रदेश से भारी उम्मीद लगाए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी इस चुनाव में प्रचार प्रसार की कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और बहुत सारे ऐसी जगह भी है जहा बीजेपी का एक पम्पलेट भी नही पहुंचा था पदाधिकारियों की निरंकुसता और आपसी मतभेद भी एक कारण है बीजेपी के उत्तर प्रदेश में कम सीट आने का.
2 – उत्तर प्रदेश में बीजेपी से नाराज चल रहे क्षत्रिय समाज भी अहम हिस्सा हो सकता है कुछ सीट डैमेज का
3- भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी को यहविश्वास हो गया था हम आसानी से चुनाव जीत जायेंगे जिसके वजह से फील्ड वर्क कम हुआ जिसके वजह से विपक्ष को भरपूर फायदा मिला.
4 – बीजेपी से नाराज युवा किसी भी भर्ती को लेकर भी नाराजगी थी की यूपी में कोई भी सरकारी नौकरी की परीक्षा के पहले ही पेपर लीक हो जाता है जिससे युवा वर्ग के लोग काफी नाराज थे जिसका खामियाजा बीजेपी को चुनाव में देखने को मिला
5 – ये सबसे अंतिम फैक्टर जो की विपक्ष को संजीवनी का कार्य किया है . विपक्ष लगातार अपने भाषणों में यह बात हमेशा दोहरा रहे थे कि अगर मोदी दोबारा सत्ता में आते हैं तो आरक्षण हटा देंगे जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश के बहुसंख्यक वोट विपक्ष को मिल गए जिसके कारण बीजेपी उत्तर प्रदेश में कम सीट ला पाई.