चिरईगांव/वाराणसी।
गांवों में ग्राम सचिवालय के महत्व को स्थानीय ग्रामीणों, ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव से बेहतर भला और कौन समझ सकता है। लेकिन यदि किसी ग्राम पंचायत में 1 17 लाख की धनराशि खर्च होने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ होने के तीन वर्ष बाद भी यदि मिनी ग्राम सचिवालय निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका तो संभवतः उस गांव के लोगों के लिए इससे बड़ा दुभर्भाग्यपूर्ण व चिंताजनक पहलू और क्या हो सकता है। प्रदेश की मौजूदा सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में कराये जा विकास कार्यों को समय से पूरा करने का न सिर्फ दावा किया जाता है। बल्कि लखनऊ से लगाये दिल्ली तक ग्रामीण विकास का ढिंढोरा भी पीटा जाता है। ऐसे में यदि ग्राम पंचायत व्यासपुर में मिनी ग्राम सचिवालय का निर्माण कार्य तीन वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका तो संभवतः विकास की ऐसी रफ्तार मोदी-योगी राज में अनहोनी ही कहा जायेगा। जिससे कछुए को भी शर्म आ जाये, मगर चिरईगांव के जिम्मेदार अफसर, ग्राम प्रधान व ग्राम को का सल, एवं सौरभ कि कल्प पों में खीर प्रीति वसर
पंचायत सचिव जो तीन वर्ष में मिनी ग्राम सचिवालय का निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सके, लगता है कि कछुए से भी ढिली चाल चल रहे है। आलम यह है कि तीन वर्ष में मिनी सचिवालय की
खिड़कियों में अभी दरवाजे तक नहीं लगने से मिनी ग्राम सचिवालय सरकारी बदहाली की कहानी बयां कर अपनी किस्मत पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। यहां पर कोई बोर्ड आदि भी न लगा होने से गांव
के अधिकांश लोगों को खबर तक नहीं है कि गांव का मिनी सचिवालय कहां बन रहा है। आखिर कैसे साकार होगा सरकार का सपना
17 लाख खर्च के बाद भी तीन वर्ष में नहीं पूरा हो सका मिनी सचिवालय, व्यासपुर में सामने आया ग्रामीण विकास का अधूरा सच
: ग्राम पंचायत व्यासपुर में ग्रामीणों की सुविधा के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 से बन रहे मिनी ग्राम सचिवालय निर्माण कार्य तीन वर्ष बाद भी अधूरा रहने से आखिरकार ग्रामीणों को एक छत के नीचे आय, जाति, निवास, खसरा,
खतौनी, आनलाईन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराने का सरकार का सपना आखिरकार कैसे साकार हो सकेगा। ग्रामीणों का कहना था कि पंचायत सचिव की लापरवाही का खामियाजा व्यासपुर व राजस्व गांव गिरधरपुर, गोकुलपुर, झांझूपुर के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। खर्च हो गये 17 लाख फिर भी नहीं सुधरे हालात: ग्रामीणों की सुविधा के लिए वर्ष 2020-21 से व्यासपुर में 27 लाख की लागत से मिनी ग्राम सचिवालय का निर्माण प्रारंभ किया गया जो तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरा है। इस सम्बंध में सहायक विकास अधिकारी पंचायत कमलेश कुमार सिंह का कहना था कि मिनी ग्राम सचिवालय निर्माण कार्य पर लगभग 17 लाख रूपये खर्च हो गये है। बताया कि मनरेगा मद का 9 लाख रूपये शेष अभी बचे हुए है। जिसका उपयोग करके दरवाजा खिड़की अ लगवाया जायेगा साथ ही रंगरोधन का कार्य भी अ कराया जायेगा। पिछले तीन वर्षों में उपरोक्त कार्य क्यों नहीं हुआ? इस पर एडीओ पंचायत का कहना था कि ग्राम पंचायत सचिव को लापरवाही बरतने के कारण नोटिस जारी कर दी गई है।